उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य पालन विभाग के केबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद आज इटावा पहुंचे। वे ‘संवैधानिक अधिकार यात्रा’ के तहत सिंचाई विभाग के गेस्टहाउस में पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने निषाद समाज के अधिकारों को लेकर बड़ा बयान दिया और समुदाय को जागरूक करने की अपील की।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि यह यात्रा 18 प्रतिशत निषाद समाज के लोगों को जागरूक, उत्साहित और एकजुट करने के लिए चलाई जा रही है। वंचित और शोषित निषाद समुदाय को जगाना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को अपने पुराने व्यवसाय के साथ उच्च शिक्षा भी प्राप्त करनी चाहिए, ताकि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर सकें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान में निषाद समाज को पूर्ण अधिकार दिए गए हैं, लेकिन उन्हें अभी भी उनका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए उनकी मांग है कि निषाद समाज को पिछड़ा वर्ग से निकालकर अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए और उन्हें पूर्ण आरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने निषाद समाज से आह्वान किया कि वे समाज में मौजूद ठेकेदार नेताओं से सावधान रहें और अपने हक की लड़ाई के लिए ईमानदार और विश्वासी नेताओं के साथ खड़े रहें।
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब 200 सीटें निषाद बाहुल्य हैं, लेकिन निषाद समाज को प्रलोभनों से बचना होगा और अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर काम करना होगा। उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि निषाद समाज के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक उत्थान के लिए यह लड़ाई जरूरी है।

इटावा मत्स्य महाविद्यालय को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आयोग के माध्यम से रिक्त पदों की पूर्ति कर महाविद्यालय को पूर्ण रूप से चालू किया जाएगा। इससे पोखर पट्टाधारी किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब वासर मेन और लेदर मेन को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, तो फिशर मेन को भी उनका पूरा अधिकार मिलना चाहिए। निषाद समाज के बच्चों की शिक्षा को लेकर उन्होंने सरकार से विशेष सहयोग की मांग की।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र मणि निषाद, राष्ट्रीय सचिव रमाकांत कश्यप और जिलाध्यक्ष मीरा निषाद,पूर्व सभासद रमेश चन्द्र बाथम, विपिन कश्यप,राजेश, नितिन कश्यप सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान निषाद समाज के उत्थान और अधिकारों को लेकर चर्चा की गई और समुदाय को संगठित करने की रणनीति पर विचार किया गया।
