गंगा की अविरल धारा बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अब सहायक नदियों के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के तहत जिले में यमुना नदी के किनारों पर किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का काम शुरू किया जाएगा। कृषि विभाग को इस योजना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी के किनारे के खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम करना है, ताकि नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत जिले के 2500 से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होंगे।

कृषि विभाग ने यमुना नदी के किनारे स्थित 20 गांवों का चयन किया है, जहां किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा, किसानों को सरकार की ओर से अनुदान देने की भी योजना है।
इस प्रक्रिया को मार्च माह के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उपकृषि निदेशक आरएन सिंह ने बताया कि यमुना नदी के किनारे के 20 गांवों को प्राकृतिक खेती के लिए चुना गया है, और इसके लिए 20 क्लस्टर बनाए गए हैं। किसान चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रोत्साहन के रूप में चार हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से धनराशि भी दी जाएगी। हालांकि, योजना में एक किसान की केवल एक एकड़ भूमि को ही शामिल किया जाएगा।
