माह के शुरुआत में ही मौसम की तल्खी बढ़ने से जिले के किसान चिंतित हो गए हैं। रबी फसल के लिए इस माह में सामान्यत: अधिकतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए, लेकिन इस सप्ताह में तापमान 25 डिग्री या उससे ऊपर तक पहुंच गया है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
तेज धूप और पछुआ हवा के कारण खेतों की नमी सूखने लगी है, जिससे रबी की मुख्य फसलें, जैसे गेहूं, दलहनी और तिलहनी फसलों का विकास प्रभावित हो रहा है। किसानों का मानना है कि यदि यह मौसम इसी तरह बना रहा, तो गेहूं के दाने का आकार छोटा हो सकता है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। साथ ही, किसानों का कहना है कि इससे गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है और पैदावार में कमी आ सकती है।
फरवरी महीने में तापमान बढ़ने के साथ ही पछुआ हवाओं ने खेतों की नमी को सूखा दिया है, जबकि कुछ दिनों पहले तक पुरवा हवा चल रही थी। इस बदलाव से पारा लगातार चढ़ रहा है, जो आठ साल बाद जिले में देखने को मिला है। इसके कारण गेहूं की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, बीते एक-दो दिनों से रात के समय मौसम में नमी देखने को मिली है, लेकिन दिन में पड़ने वाली तेज धूप किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि इन दिनों खेतों में नमी बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि फसलों का उचित विकास हो सके और तापमान के कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
