इटावा जिले में सरकार द्वारा युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना बैंकों की उदासीनता के कारण बाधित हो रही है। जिले में अब तक इस योजना के तहत 440 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 69 लाभार्थियों के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक केवल 7 लाभार्थियों को ही ऋण वितरित किया गया है।
यूनियन बैंक ने सर्वाधिक तीन लाभार्थियों को ऋण वितरित किया है, जबकि भारतीय स्टेट बैंक को 150 फाइलें भेजी गईं, लेकिन उसने केवल दो लाभार्थियों को ही ऋण प्रदान किया है। इस संबंध में जिला उद्योग एवं उद्यमिता विकास केंद्र, इटावा के उपायुक्त सुधीर कुमार ने बताया कि बैंकों द्वारा रुचि न लेने के कारण योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया है।
सुधीर कुमार ने आगे बताया कि सबसे अधिक शिकायतें भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक को लेकर आ रही हैं। बैंकों की सुस्ती और लापरवाही के कारण युवाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा होने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 21 से 40 वर्ष तक के युवक-युवतियां आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा 8 निर्धारित की गई है। योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज और बिना गारंटी के दिया जा रहा है। यह योजना युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई थी।
बैंकों की सुस्ती और उदासीनता के कारण योजना का लाभ पूरी तरह से जरूरतमंद युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल उठ रहे हैं। अभी भी इच्छुक युवा इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, लेकिन बैंकों की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।
