इटावा जिला चिकित्सालय, मोतीझील, इटावा में लुई ब्रेल का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिव्यांग बच्चों के लिए आयोजित मेडीकल एसेसमेंट कैम्प के दौरान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिटी मजिस्ट्रेट दिग्विजय प्रताप ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर लुई ब्रेल को श्रद्धांजलि दी।

इस मेडीकल एसेसमेंट कैम्प का आयोजन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गीताराम के निर्देशन में किया गया। इसमें डॉ. बलराज सिंह (नोडल अधिकारी), डॉ. श्रेशांक कुमार (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. जे.पी. चौधरी (नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ), डॉ. अजय कुमार (टेक्निकल ऑफिसर), डॉ. विष्णु मेहरोत्रा (अस्थि रोग विशेषज्ञ), और डॉ. श्वेता यादव (मानसिक रोग विशेषज्ञ) सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। इस दौरान कुल 22 दिव्यांग बच्चों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 18 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षण में उपयोग होने वाले ब्रेल स्टेशनरी उपकरण भी वितरित किए गए। 9 वर्षीय ओजस यादव ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। उसने ब्रेल लिपि में लिखी पाठ्य पुस्तक और अन्य सामग्री को बड़े ही आत्मविश्वास के साथ पढ़कर सुनाया। उसकी भाषा शैली, अध्ययन क्षमता और स्पीड देखकर मेडीकल बोर्ड में उपस्थित अधिकारी और डॉक्टर प्रभावित हुए।

ओजस और दिव्यांश ने लुई ब्रेल के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए उनकी उपलब्धियों का वर्णन किया। विशेष शिक्षक रामकुमार यादव के सहयोग से बच्चों ने ब्रेल लिपि के उपकरणों के उपयोग और उनकी शिक्षा में उपयोगिता को समझाया।
इस अवसर पर जिला समन्वयक समेकित शिक्षा अर्चना सिन्हा ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और कहा, “अक्षमता कोई अभिशाप नहीं है। दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के माध्यम से हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।” उन्होंने लुई ब्रेल के जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि उनका जन्म 4 जनवरी 1809 को फ्रांस में हुआ था। मात्र तीन वर्ष की उम्र में दृष्टिहीन हो जाने के बावजूद उन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार कर दृष्टिबाधितों के लिए शिक्षा का नया द्वार खोला।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशेष शिक्षकों और अतिथियों ने इस आयोजन की सराहना की। दिव्यांग बच्चों ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया और समाज के प्रति सकारात्मक संदेश दिया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। लुई ब्रेल की प्रेरणा से दृष्टिबाधित बच्चों ने समाज में अपनी पहचान बनाने का संदेश दिया।
