इटावा, 15 अक्टूबर 2026। जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन एवं शत-प्रतिशत संतृप्ति अभियान 2026-27 तथा एमएसएमई ऋण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र एवं प्रदेश सरकार की ओर से संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी ऋण योजनाओं की बैंकवार प्रगति, वार्षिक लक्ष्यों के सापेक्ष उपलब्धि, बैंकों को भेजे गए आवेदनों, ऋण स्वीकृति एवं वितरण, निरस्त प्रकरणों तथा लंबित आवेदनों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी ऋण योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करें। लंबित आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के साथ ही पात्र लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी न की जाए।

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन एवं संतृप्ति अभियान 21 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य ग्राम पंचायतों एवं शहरी स्थानीय निकायों में वित्तीय समावेशन से संबंधित प्रमुख योजनाओं की शत-प्रतिशत संतृप्ति सुनिश्चित करना है। इसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से पात्र व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, बैंकिंग सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा ऋण सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत ऐसे पात्र नागरिकों तक भी बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा, जो अभी तक विभिन्न वित्तीय योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना सभी बैंकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान शुरू होने से पहले सभी बैंक आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर लें। ग्राम पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में आयोजित होने वाले विशेष शिविरों में बैंक अधिकारी और संबंधित कर्मचारी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। शिविरों में आने वाले लोगों को योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों तथा उपलब्ध बैंकिंग सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए, जिससे पात्र व्यक्ति आसानी से योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
डीएम ने बैंकिंग संवाददाताओं यानी कस्टमर सर्विस प्वाइंट (सीएसपी) के माध्यम से भी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में अधिकाधिक पात्र नागरिकों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के लिए बैंकिंग संवाददाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इनके माध्यम से लोगों को बैंकिंग सुविधाओं, बीमा सुरक्षा तथा विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही आमजन को वित्तीय साक्षरता, सुरक्षित डिजिटल लेनदेन और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि लोग डिजिटल बैंकिंग का सुरक्षित तरीके से उपयोग कर सकें और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां अपना सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण योजना (ओडीओपी), एक जनपद एक व्यंजन योजना (ओडीओसी) तथा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की प्रगति की बैंकवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों से योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों, स्वीकृत ऋण, वितरित ऋण, निरस्त प्रकरणों और लंबित आवेदनों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बैंक शाखाओं को गंभीरता से काम करना होगा। पात्र आवेदकों को समय से ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही आवेदन प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनपद इटावा के लिए वार्षिक लक्ष्य 1,700 निर्धारित किया गया है। उपलब्ध समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 574 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं और 574 लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया है, जबकि विभिन्न बैंक शाखाओं में 366 आवेदन लंबित हैं। जिलाधिकारी ने इस स्थिति की समीक्षा करते हुए योजना की प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। बैंक अधिकारी लंबित आवेदनों की जांच कर पात्र आवेदकों को नियमानुसार शीघ्र ऋण उपलब्ध कराएं, जिससे योजना के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में तेजी से कार्य किया जा सके।
एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण योजना (ओडीओपी) की समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद का भौतिक लक्ष्य 42 तथा वित्तीय लक्ष्य 168 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार बैंकों को भेजे गए आवेदनों में से 21 पर ऋण वितरण किया गया है, जबकि 51 आवेदन निरस्त किए गए हैं और 28 आवेदन लंबित हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना के अंतर्गत पात्र उद्यमियों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। लंबित प्रकरणों की बैंकवार समीक्षा कर उनके निस्तारण में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आवेदन निरस्त किए जाने की स्थिति में नियमानुसार स्पष्ट कारण दर्ज किए जाएं, जिससे आवेदकों को अपनी कमियों की जानकारी मिल सके और वे आवश्यक सुधार कर सकें।
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 173 लाख रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपलब्ध समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस योजना के अंतर्गत 75.66 लाख रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। बैंकों को भेजे गए कुल 166 आवेदनों में से 29 पर ऋण वितरण किया गया है, जबकि 61 आवेदन निरस्त किए गए हैं और 76 आवेदन विभिन्न बैंक शाखाओं में लंबित हैं। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर संबंधित बैंक अधिकारियों को लंबित आवेदनों की समीक्षा कर पात्र लाभार्थियों को समय से ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो स्वरोजगार स्थापित कर अपनी आजीविका को मजबूत करना चाहते हैं। इसके लिए बैंक अधिकारी आवेदन प्राप्त होने से लेकर ऋण वितरण तक की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने का प्रयास करें।
जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकारी ऋण योजनाओं का उद्देश्य युवाओं, छोटे उद्यमियों तथा स्वरोजगार स्थापित करने के इच्छुक लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इन योजनाओं के माध्यम से लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने, मौजूदा उद्यम को आगे बढ़ाने तथा रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित करने में सहायता मिलती है। छोटे ऋण भी पात्र लाभार्थियों के लिए स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इसलिए सभी बैंक सरकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए ऋण आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण करें और बिना उचित कारण के किसी भी आवेदन को लंबित न रखें।
उन्होंने निर्देश दिए कि ऋण आवेदन निरस्त करते समय नियमानुसार स्पष्ट कारण दर्ज किए जाएं। जिन आवेदनों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी या अन्य औपचारिकताओं के पूरा न होने के कारण देरी हो रही है, उनके संबंध में आवेदकों को समय से जानकारी दी जाए। बैंक शाखाएं आवेदकों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और आवेदन संबंधी कमियों को दूर करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करें। इससे पात्र लाभार्थियों के आवेदन समय से पूरे हो सकेंगे और ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया अधिक सुगम बनाई जा सकेगी।
डीएम ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों को योजनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं। वित्तीय समावेशन अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित कर अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं, बीमा सुरक्षा तथा सरकारी ऋण योजनाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे केवल आवेदनों के निस्तारण तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं की जानकारी पात्र लोगों तक पहुंचाने और उन्हें आवेदन से लेकर ऋण वितरण तक आवश्यक सहयोग प्रदान करने पर भी विशेष ध्यान दें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, उपायुक्त उद्योग आत्मदेव शर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) सतीश कुमार, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में वित्तीय समावेशन अभियान की तैयारियों और विभिन्न ऋण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से लाभान्वित करने तथा जनपद में स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
