ताखा। क्षेत्र के सरसई नावर में ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का शुभारंभ सोमवार को धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। रामलीला महोत्सव के पहले दिन कलाकारों ने देवर्षि नारद मोह और भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का भावपूर्ण मंचन किया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। भगवान श्रीराम के जन्म का दृश्य सामने आते ही रामलीला परिसर में मौजूद श्रद्धालु खुशी से झूम उठे और पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। पहले ही दिन रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शकों की भीड़ उमड़ी।
ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का शुभारंभ श्री हजारी महादेव मंदिर के महंत सियारामदास ने किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रामायण के प्रसंग मनुष्य को सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श आचरण और लोककल्याण का संदेश देता है। ऐसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
रामलीला के प्रथम प्रसंग में देवर्षि नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने दिखाया कि देवर्षि नारद कठोर तपस्या के प्रभाव से कामदेव पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। इस सफलता के बाद उनके मन में अपनी तपस्या और उपलब्धि को लेकर अभिमान उत्पन्न हो जाता है। भगवान विष्णु देवर्षि नारद के इसी अभिमान को दूर करने के लिए अपनी माया रचते हैं। भगवान की माया के प्रभाव में आकर नारद मोह में पड़ जाते हैं। कलाकारों ने प्रसंग को संवादों और अभिनय के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक पूरी तन्मयता के साथ लीला देखते रहे। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मनुष्य को अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए।
इसके बाद रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का मंचन हुआ। अयोध्या के राजा दशरथ के घर भगवान श्रीराम के जन्म का दृश्य प्रस्तुत होते ही रामलीला परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और भगवान के जन्म की खुशी में उत्साह व्यक्त किया। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए। राम जन्म के प्रसंग ने पूरे आयोजन में विशेष उत्साह भर दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए लीला का आनंद लिया।
सरसई नावर का ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है। प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की भागीदारी रहती है। रामलीला के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत कर लोगों तक धार्मिक और नैतिक संदेश पहुंचाए जाते हैं। महोत्सव के पहले दिन ही बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को प्रदर्शित किया।
इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार प्रजापति सहित कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे रहे। उन्होंने रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए व्यवस्थाएं संभालीं। महोत्सव में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मौजूद रहे। नारद मोह और राम जन्म की लीला के सफल मंचन के साथ सरसई नावर के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का धार्मिक वातावरण में आगाज हुआ।
