इटावा, 09 अक्टूबर 2026। कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान टीबी उन्मूलन अभियान, संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों के भुगतान तथा गर्भवती महिलाओं के प्रथम तिमाही पंजीकरण सहित स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने, निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष ध्यान देकर कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में टीबी नोटिफिकेशन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 07 अक्टूबर 2026 तक जनपद में टीबी नोटिफिकेशन की प्रगति 92.58 प्रतिशत रही है। वहीं, विभिन्न टीबी यूनिटों की स्थिति की समीक्षा में टीयू राजपुर की प्रगति 49.77 प्रतिशत, भरथना की 64.92 प्रतिशत तथा जसवंतनगर की 60.77 प्रतिशत पाई गई। इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम प्रगति को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को टीबी मरीजों की पहचान और नोटिफिकेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों की समय से पहचान कर उनका उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है। इससे बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी और मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि टीबी की जांच, मरीजों की पहचान और उपचार से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (PMTBMBA) वर्ष 2026 की प्रगति बैठक में 69.53 प्रतिशत बताई गई। जिलाधिकारी ने अभियान की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित गतिविधियों को गंभीरता और प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्तर पर तैनात कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करना होगा। कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष प्रयास किए जाएं, जिससे अधिक से अधिक संभावित मरीजों तक पहुंचकर उनकी जांच और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में अप्रैल से सितंबर 2026 तक संस्थागत प्रसव की प्रगति की समीक्षा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में जनपद में 2,624 संस्थागत प्रसव हुए थे, जबकि सितंबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,304 रह गई। इस स्थिति पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और संस्थागत प्रसव की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार करने को कहा। उन्होंने विशेष रूप से महेवा और बसरेहर सहित कम प्रगति वाले क्षेत्रों में स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए समय से स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए फील्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और गर्भवती महिलाओं से संपर्क बनाए रखते हुए उन्हें संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने निजी स्वास्थ्य केंद्रों की भी जांच कराने के निर्देश दिए, ताकि वहां निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों और प्रसव से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत लाभार्थियों को किए जाने वाले भुगतान की समीक्षा के दौरान कुल प्रगति 70.75 प्रतिशत बताई गई। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर संबंधित अधिकारियों को भुगतान की नियमित समीक्षा करने तथा पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार समय से धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इसलिए भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि लाभार्थियों से संबंधित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करते हुए योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाया जाए।
बैठक में गर्भवती महिलाओं के प्रथम तिमाही पंजीकरण की तुलनात्मक समीक्षा भी की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चकरनगर की प्रगति 79.97 प्रतिशत, महेवा की 70.04 प्रतिशत, सैफई की 62.21 प्रतिशत तथा ताखा की 40.12 प्रतिशत रही। आंकड़ों में ताखा की प्रगति सबसे कम सामने आने पर जिलाधिकारी ने ताखा के साथ-साथ सैफई और महेवा में भी पंजीकरण की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण होने से महिलाओं को समय से प्रसवपूर्व जांच, जरूरी चिकित्सकीय परामर्श और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका समय से पंजीकरण कराया जाए तथा उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित किया जाए। कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष कार्ययोजना बनाकर अभियान के रूप में कार्य करने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने बैठक के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा की जाए और जिन क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति नहीं हो रही है, वहां विशेष कार्ययोजना बनाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने फील्ड स्तर पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी तय करने, उनके कार्यों की निगरानी करने और योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए विभागीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा, ताकि जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बृजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (पुरुष) परितोष शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (महिला) अनिल कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, समस्त एमओआईसी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
