ऊसराहार। युवा रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के चौथे दिन भगवान श्रीराम के वनवास, राजा दशरथ के करुण विलाप और राम-केवट संवाद की अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण लीला का मंचन किया गया। मंच पर प्रस्तुत दृश्यों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जैसे ही भगवान श्रीराम के वनगमन का प्रसंग आया, पूरा रामलीला परिसर भक्ति और करुणा के भावों से भर उठा। अयोध्यावासियों का श्रीराम के पीछे दौड़ना और पुत्र वियोग में राजा दशरथ का मूर्छित होकर गिर पड़ना दर्शकों की आंखें नम कर गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ नवजीवन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. शिवओम वर्मा ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर किया। इसके बाद मंच पर अयोध्या के राजमहल का दृश्य साकार हुआ, जहां महारानी कैकई ने राजा दशरथ को उनके द्वारा दिए गए दो वरदानों की याद दिलाई। कैकई ने भरत के लिए राजसिंहासन और श्रीराम के लिए 14 वर्ष के वनवास की मांग रखी। यह मांग सुनते ही राजा दशरथ शोक और पीड़ा से व्याकुल हो उठे। कलाकारों द्वारा किए गए जीवंत अभिनय ने दर्शकों को उस युग की भावनाओं से जोड़ दिया।
लीला के अगले दृश्य में भगवान श्रीराम ने पिता के वचन और राजधर्म की रक्षा के लिए वनवास स्वीकार कर लिया। माता सीता ने पति धर्म का निर्वहन करते हुए उनके साथ वन जाने का निर्णय लिया, जबकि भाई लक्ष्मण ने भी अपने बड़े भाई की सेवा के लिए वनगमन का संकल्प लिया। जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या छोड़कर वन की ओर प्रस्थान करने लगे तो अयोध्यावासी उन्हें रोकने के लिए पीछे-पीछे दौड़ पड़े। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि दर्शक भी भावुक हो गए और पूरा वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।
वनगमन के बाद गंगा तट पर भगवान श्रीराम और निषादराज केवट के बीच हुए संवाद का मंचन किया गया। केवट ने भगवान श्रीराम को गंगा पार कराने से पहले उनके चरण धोने की इच्छा व्यक्त की। उसने विनम्र भाव से कहा कि जिन चरणों के स्पर्श से पत्थर भी नारी रूप में परिवर्तित हो गया, कहीं उसकी नाव भी किसी चमत्कार का शिकार न हो जाए। केवट की निश्छल भक्ति, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट प्रेम का यह प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय को छू गया। राम और केवट के बीच हुए संवाद ने भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत संदेश दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. शिवओम वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए आदर्श है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने राजगद्दी, वैभव और सुख-सुविधाओं का त्याग कर पिता के वचन की रक्षा की, जो त्याग, सत्य और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
रामलीला के समापन पर समिति की ओर से डॉ. शिवओम वर्मा, डॉ. संजोली वर्मा, विजय वर्मा, आदेश गुप्ता, विवेक दुबे, घनश्याम शर्मा, अगनू कौशल, रत्नेश पांडेय, भूरे शाक्य, हरिशंकर शाक्य, सचिन यादव, सुनील यादव, विश्वंभर चक्रवर्ती, उमेश पाल, अनुज कौशल, सदानंद गुप्ता, अरविंद शर्मा एवं सुदेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोगों को सम्मानित किया गया। समिति पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए रामलीला महोत्सव के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, कलाकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
देर रात तक चले इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। राम वनवास और केवट संवाद की मार्मिक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी और पूरा रामलीला मैदान भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिया।
