ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (सेंट आरसेटी), इटावा द्वारा केंद्रीय कारागार में बंदियों के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों को कौशल विकास से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा रिहाई के बाद स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सेंट आरसेटी, इटावा की निदेशक अर्चना कुमारी, वरिष्ठ संकाय सदस्य विपिन कुमार, प्रशिक्षक मनोज कुमार विद्यार्थी (फिरोजाबाद), जेलर के.पी. सिंह तथा वरिष्ठ अधीक्षक राजीव शुक्ला की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। सभी अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों ने बंदियों को प्रशिक्षण के महत्व और स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें कम्पोस्ट एवं सब्सट्रेट की तैयारी, स्पॉन (बीज) का उपयोग, बैग भरने की तकनीक, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन, फसल की देखभाल तथा मशरूम के विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
प्रशिक्षकों ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक आय देने वाला व्यवसाय है, जिसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है। इस प्रकार का प्रशिक्षण बंदियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करेगा और उनके भविष्य को नई दिशा प्रदान करेगा।
अधिकारियों ने कहा कि कौशल विकास आधारित ऐसे कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास, आत्मविश्वास में वृद्धि तथा समाज की मुख्यधारा से पुनः जुड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेंट आरसेटी, इटावा द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध हो सकें।
