लोकसभा में किसानों की बदहाली और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया गया। सदन में दिए गए भाषण के दौरान किसानों की आर्थिक स्थिति, फसल के उचित दाम और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया।
भाषण में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को सम्मान देने की मांग करते हुए कहा गया कि संसद के दोनों सदनों के बीच उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए, ताकि उनके योगदान को उचित सम्मान मिल सके।
किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान सम्मान निधि की राशि को दोगुना करने की मांग भी उठाई गई। वक्ता ने कहा कि इससे अन्नदाता को वास्तविक राहत मिल सकेगी और उनकी आय में सुधार होगा।
आलू किसानों की समस्या पर विशेष रूप से चिंता जताते हुए बताया गया कि सही दाम न मिलने के कारण कई किसानों को अपनी फसल खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़नी पड़ रही है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
इसके अलावा इटावा, औरैया और कानपुर देहात में सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और आवारा पशुओं की समस्या के समाधान पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि इन समस्याओं के समाधान के बिना किसानों की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। देश का समग्र विकास तभी संभव है जब किसान खुशहाल होगा, क्योंकि किसान ही देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
