डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी वार्ड में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। हार्ट अटैक एवं गंभीर अवस्था में लाए जाने वाले मरीजों के उपचार में उपयोग किए जाने वाले कई आवश्यक इंजेक्शन एक्सपायर पाए गए, जिससे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एट्रोपिन और एड्रोप्रो नामक इंजेक्शन एक्सपायर हालत में मिले। ये इंजेक्शन हृदयाघात सहित अन्य गंभीर मरीजों के तत्काल उपचार में प्रयोग किए जाते हैं। इमरजेंसी जैसे संवेदनशील विभाग में एक्सपायर दवाओं का पाया जाना मरीजों के जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है।
यह मामला उस समय उजागर हुआ जब एक वृद्ध महिला को गंभीर हालत में इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाने के निर्देश दिए गए। इस दौरान जब कंपाउंडर ने इंजेक्शन उठाया तो उस पर एक्सपायरी तिथि अंकित पाई गई। मरीज की स्थिति नाजुक देख इमरजेंसी में मौजूद स्टाफ ने आनन-फानन में एक्सपायर इंजेक्शन हटाने की कार्रवाई शुरू की।
घटना की जानकारी लेने पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। कुछ जिम्मेदार लोग इसे मामूली घटना बताकर टालने का प्रयास करते नजर आए।
पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. परितोष शुक्ला ने बताया कि संबंधित सॉल्ट के इंजेक्शन नए स्टॉक में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में एक्सपायर इंजेक्शन कैसे रखे गए, इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है। साथ ही तत्काल चीफ फार्मासिस्ट को इमरजेंसी भेजकर सभी एक्सपायर इंजेक्शन हटवाने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. शुक्ला ने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात भी कही है।
इस घटना के बाद अस्पताल की दवा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों में भी इस लापरवाही को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है।

