केदारेश्वर महादेव मंदिर निर्माण पर विवाद, साधु-संतों ने जताई आपत्ति

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इटावा में बनवाए जा रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह मंदिर उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है, लेकिन कुछ साधु-संतों ने इसके निर्माण पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर का निर्माण अनुचित प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। इस विवाद ने सियासी हलकों में भी हलचल मचा दी है।

यह भव्य मंदिर इटावा के लोहन्ना चौराहे के पास ग्वालियर हाईवे पर लायन सफारी के सामने 12 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है। इसकी ऊंचाई लगभग 72 फीट होगी और इसमें तीन नंदी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, जिनमें से एक 13 फीट ऊंची होगी। मंदिर निर्माण में तमिलनाडु से लाए गए 500 ट्रक कृष्ण पुरुष शिला पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जिनका कुल वजन 75,000 टन बताया जा रहा है। यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे भव्य मंदिरों में से एक होगा और इसके वास्तुशिल्प को खासतौर पर केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।

मंदिर के गर्भगृह में नेपाल के पोखरा से लाई गई विशाल शालिग्राम शिला स्थापित की गई है। यह शिला 7 फीट ऊंची, 6 फीट चौड़ी और 13 टन वजन की है। इसे लखनऊ लाए जाने के बाद अखिलेश यादव और अन्य नेताओं द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर में स्थापित किया गया। मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव इस मंदिर के जरिए हिंदू वोटबैंक को साधने और भाजपा के ‘राम मंदिर’ कार्ड का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव गोपाल यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का निर्माण धार्मिक आस्था से प्रेरित है, न कि राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है।

इस मंदिर को लेकर कुछ साधु-संतों ने आपत्ति जताई है। उनकी ओर से कहा जा रहा है कि मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया और स्थान का चुनाव ठीक से नहीं किया गया है। हालांकि, इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अब तक अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।

इस पूरे विवाद के बीच अब सवाल यह उठता है कि क्या मंदिर निर्माण से जुड़े मुद्दों को सुलझाया जाएगा, या यह विवाद और गहराएगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव इस पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या साधु-संतों की आपत्तियों का समाधान निकाला जाएगा। इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है। जहां एक ओर इसे उत्तर प्रदेश के सबसे भव्य मंदिरों में गिना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके निर्माण पर उठते सवाल इसे विवादों में घसीट रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस मंदिर का निर्माण बिना किसी बाधा के पूरा होगा या नहीं।

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