विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। सभी जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर बिजली कर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद की। राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय और शक्ति भवन पर बड़े पैमाने पर विरोध सभा आयोजित की गई।
इटावा में संघर्ष समिति के संयोजक इं. विवेक कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता इं. हनुमान प्रसाद मिश्रा, अवर अभियंता संगठन के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार, टीजी-2 संगठन के अध्यक्ष मदन यादव सहित अन्य बिजली कर्मचारियों ने मंडल कार्यालय पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने मांग की कि ग्रेटर नोएडा और आगरा के निजीकरण का श्वेत पत्र जारी किया जाए, जिससे जनता को यह पता चले कि निजीकरण से पावर कॉरपोरेशन को कितना घाटा हुआ और आम उपभोक्ताओं को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
संघर्ष समिति ने कहा कि 1993 में ग्रेटर नोएडा और 2010 में आगरा का निजीकरण किया गया था, लेकिन इसके बाद पावर कॉरपोरेशन को लगातार बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। 2023-24 में पावर कॉरपोरेशन ने 5.55 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी, लेकिन इसे टोरेंट कंपनी को महज 4.36 रुपये में बेचना पड़ा, जिससे 275 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। पिछले 14 वर्षों में आगरा के निजीकरण से 2434 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। समिति ने आरोप लगाया कि टोरेंट कंपनी सस्ती दर पर बिजली खरीदकर महंगे दामों पर बेचकर मुनाफा कमा रही है, जबकि अगर निजीकरण न हुआ होता, तो यह लाभ पावर कॉरपोरेशन को मिलता।
संघर्ष समिति ने ग्रेटर नोएडा के निजीकरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 1993 में नोएडा पावर कंपनी को 54 महीनों में अपना बिजली उत्पादन घर लगाने की शर्त दी गई थी, लेकिन आज तक एक भी मेगावाट बिजली उत्पादन नहीं किया गया। इसके बजाय, पावर कॉरपोरेशन को महंगी दरों पर बिजली खरीदकर नोएडा पावर कंपनी को सस्ते में बेचनी पड़ी, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ।
प्रदेशभर में वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में भी बिजली कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
