भारत विकास परिषद धर्मार्थ सेवा शाखा के तत्वावधान में शहर के अति प्राचीन मोहल्ला छिपैटी स्थित सनातन धर्म सरस्वती विद्यापीठ में माता सरस्वती महोत्सव एवं बसंत पंचमी पर्व को पूरे विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर माता सरस्वती के प्राण प्रतिष्ठित विग्रह के समक्ष हवन, पूजन, अर्चन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत कर्मकांडी विद्वान पं. प्रदीप दुबे द्वारा यज्ञ वेदी के पूजन से हुई। इसके पश्चात उपस्थित यजमानों एवं गणमान्य अतिथियों ने हवन में आहुतियां अर्पित कीं। हवन में प्रमुख रूप से परिषद के संरक्षक डॉ. विद्याकांत तिवारी, परिषद के कार्यशाला प्रभारी हरिदत्त दीक्षित, सचिव सुधीर मिश्र, कोषाध्यक्ष महेश कुमार बाथम, वरिष्ठ सदस्य आचार्य महेश चंद्र तिवारी, सीबी मिश्रा, देवेश शास्त्री, भजन गायक प्रखर गौड़, रमेश तोमर, दिव्या तोमर, केके पाठक, शोभा त्रिपाठी, मुन्नी अग्रवाल सहित अनेक धर्मनिष्ठ महिलाओं एवं सम्मानित नागरिकों ने भाग लिया।

बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महोपाध्याय डॉ. विद्याकांत तिवारी ने कहा कि यह दिन मां सरस्वती का आविर्भाव दिवस माना जाता है, जो ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं। उन्होंने कहा, “वेदों से लेकर आधुनिक ज्ञान तक जो कुछ भी पढ़ा, लिखा और स्मरण किया जाता है, वह मां सरस्वती की कृपा का ही परिणाम है।” तिवारी जी ने यह भी बताया कि आज के दिन छायावाद के महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का भी जन्मदिन है, जिन्होंने “वीणा वादिनी वर दे” जैसी कालजयी वंदना के माध्यम से समाज में नव जागरण का संदेश दिया।

कार्यक्रम में विद्वान देवेश शास्त्री ने गर्ग संहिता के उद्धरणों के माध्यम से रोचक प्रसंग सुनाया, जिसमें ब्रह्माजी के पुत्र नारदजी के गंधर्व बनने के शाप और मां सरस्वती की कृपा से उन्हें करतल वीणा प्राप्त होने का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम के अंत में पं. प्रदीप दुबे को परिषद शाखा की ओर से अंगवस्त्र और गर्म शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। साथ ही, सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।
