इमरान बेग- इटावा : हज़रत दीन अली और मस्तान शाह बाबा के उर्स मुबारक के मौके पर एक भव्य नातियां मुशायरे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उर्स के रस्मी अवसर पर शायरी और नातिया कलाम प्रस्तुत किए गए।
मुकर्रर खुसूसी अब्दुल वाजिद अशरफी की अध्यक्षता में आयोजित इस मुशायरे में सरपरस्ती की जिम्मेदारी हाजी मुईनुद्दीन अशरफी गुड्डू मसूरी ने निभाई, जबकि मेहमाने खुसूसी हाजी फहीमउद्दीन वारसी थे। मुशायरे की सदारत हाजी हन्नान चांद मंसूरी ने की, और निजामत की ज़िम्मेदारी मशहूर शायर रौनक अशरफी इटावी ने अदा की।
कार्यक्रम की शुरुआत कारी उमर बरकाती द्वारा तिलावते कुरआन पाक से हुई। इसके बाद हाशिम नाईमी ने अपनी कविता प्रस्तुत की, “किस दरजा नवाजा है मुझको, मैं एक कतरा था समंदर हो गया।” वहीं यासीन अंसारी ने कहा, “अकीदत से नाते नबी जब लिखी है मुझे, यूं लगा रौशनी मिल गई है।”
रियाज़ इटावी ने अपनी शायरी में कहा, “दुनिया के खजाने हो मुबारक तुझे, मेरे लिए ईमान की दौलत ही बहुत है।” रौनक इटावी ने कहा, “पहुंचे नबी मेराज पे, आओ रब ने कहा आज की शाब मेहबूब से पर्दा कोई नहीं।”
मुशायरे में अन्य शायरों ने भी अपनी उम्दा शायरी प्रस्तुत की, जिनमें साबिर हुसैन, नदीम अहमद एडवोकेट, कमर इटावी, हादी हसन, सागर इटावी, हाफिज मोहम्मद अहमद अकबरी, हाफिज परवेज़ आलम, जहांगीर मुम्बई, शाहनवाज मुम्बई, इसरार अहमद मिसबाई आदि प्रमुख थे।
मुशायरे के कन्वीनर वाईके शफी, ज्वाईंट कन्वीनर कासिम, दिलशाद पहलवान, मो शारिक, औसाफ और दरगाह के ख़ादिम शाहिद वारसी ने आए हुए मेहमानों का शाल ओढ़ाकर और गुलपोशी करके स्वागत किया।इस कार्यक्रम में हाजी अज़ीम वारसी, हाजी राईस चिश्ती, अहमद अली वारसी, क़माल चिश्ती, इन्स्तजार खां, शोऐब वारसी और मास्टर अरमान वारसी भी मौजूद रहे।
