लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, संवेदनशील, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत लखनऊ में उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना शृंखला’ का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी तथा भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

इस क्षेत्रीय कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण को गति देना, सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यक्षमता को विकसित करना तथा प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत बनाना है। कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका, क्षमता विकास की रणनीतियों और सरकारी कार्मिकों के कौशल उन्नयन से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक क्षमता विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से UNNATI Capability Index तथा National Curriculum Design Framework का भी शुभारंभ किया गया। इन पहलों को सरकारी कार्मिकों के प्रशिक्षण, संस्थागत क्षमता निर्माण और पाठ्यक्रम विकास की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
क्षमता आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था के अंतर्गत सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता और नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा के शुभारंभ से प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक सुव्यवस्थित बनाने तथा विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को मजबूत करने की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कार्यशाला के दौरान सरकारी कार्मिकों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में देश में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले राज्यों को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उत्तर प्रदेश के विभागों को भी सम्मान प्रदान किया गया।
इस सम्मान समारोह का उद्देश्य प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले राज्यों और विभागों के प्रयासों को पहचान देना तथा अन्य संस्थानों को भी बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। सरकारी सेवाओं में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और कर्मचारियों की दक्षता को मजबूत करने के लिए संस्थानों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत इस प्रकार की पहल प्रशासनिक प्रशिक्षण को नियमित प्रक्रिया से आगे बढ़ाकर उसे परिणाम आधारित बनाने की दिशा में काम करती है। इससे सरकारी कार्मिकों की क्षमताओं का विकास करने, नई कार्यप्रणालियों को अपनाने और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए बेहतर नीतियां बनाना जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन तैयार करना भी है।
उन्होंने मिशन कर्मयोगी के संकल्प को इसी उद्देश्य से जुड़ा बताते हुए कहा कि सक्षम प्रशासन उत्तर प्रदेश की परिवर्तन यात्रा का भी आधार है। प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध कार्यवाही और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री के संदेश का प्रमुख केंद्र सरकारी कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता रही। बदलती परिस्थितियों में सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नए कौशल, आधुनिक कार्यप्रणालियों और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाना महत्वपूर्ण है। मिशन कर्मयोगी इसी दिशा में प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास को प्राथमिकता देता है।
लखनऊ में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना शृंखला’ का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण पर विचार करना है। प्रशिक्षण संस्थान सरकारी कार्मिकों को आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक दक्षता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समयानुकूल होना, पाठ्यक्रमों का कार्यक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाना तथा प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करना आवश्यक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों को अपनी कार्यप्रणाली मजबूत करने और क्षमता विकास के नए तरीकों को अपनाने के अवसर मिलते हैं।
मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता विकास की अवधारणा सरकारी कर्मचारियों को केवल निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें अधिक जिम्मेदार, दक्ष और परिणाम केंद्रित तरीके से कार्य करने के लिए तैयार करने पर भी जोर देती है।
प्रशासनिक क्षमता विकास का सीधा संबंध सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं से है। प्रशिक्षित और दक्ष कार्मिक योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने, समस्याओं का समाधान करने तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसी दृष्टिकोण के तहत प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण, पाठ्यक्रमों के विकास और कार्मिकों की क्षमताओं के मूल्यांकन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UNNATI Capability Index और National Curriculum Design Framework का शुभारंभ भी इसी व्यापक क्षमता विकास प्रक्रिया का हिस्सा है।
कार्यशाला में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण पर जोर दिए जाने से प्रशासनिक प्रशिक्षण व्यवस्था में समन्वय, गुणवत्ता और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने की दिशा में संवाद को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन कर्मयोगी को उत्तर प्रदेश की परिवर्तन यात्रा का आधार बताते हुए सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दृष्टिकोण के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत सुधारों के साथ-साथ उन्हें लागू करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता का विकास भी आवश्यक है।
लखनऊ में आयोजित यह कार्यशाला प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका को मजबूत करने, सरकारी कार्मिकों की दक्षता बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती है। कार्यक्रम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों और उत्तर प्रदेश के विभागों को सम्मानित करना भी प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की पहल है।
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य सरकारी कार्मिकों को अधिक सक्षम बनाकर ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था के निर्माण को प्रोत्साहित करना है, जो प्रभावी नीति क्रियान्वयन, बेहतर जनसेवा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में योगदान दे सके।
