गोरखपुर। शारदीय नवरात्र की महाष्टमी के पावन अवसर पर रविवार की रात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में विशेष महानिशा पूजन और हवन किया। इस दौरान उन्होंने नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपराओं के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में मां भगवती की आराधना की गई।
महाष्टमी को शारदीय नवरात्र का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाष्टमी की रात्रि में होने वाला महानिशा पूजन विशेष फलदायी माना जाता है। इसी परंपरा के अंतर्गत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा और हवन किया।
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नाथ संप्रदाय की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए वैदिक मंत्रों के साथ अनुष्ठान संपन्न किया। महानिशा पूजन और हवन भारतीय धार्मिक संस्कृति तथा शक्ति उपासना की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नवरात्र के दौरान देशभर के देवी मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
श्री गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर की प्रमुख धार्मिक पहचान होने के साथ ही नाथ संप्रदाय की महत्वपूर्ण पीठ भी है। यहां विभिन्न पर्वों और धार्मिक अवसरों पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां आयोजित होती हैं, जिनका अपना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
महाष्टमी की रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया विशेष महानिशा पूजन नवरात्र की धार्मिक परंपराओं और शक्ति आराधना के महत्व को दर्शाता है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस अनुष्ठान के माध्यम से नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया।
