इटावा, 14 अक्टूबर 2026। जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने योजनाओं की समीक्षा तेज कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न पेंशन योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा बाल कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराया जाए और लंबित आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, फर्जी अभिलेखों के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का प्रयास करने वाले अपात्र व्यक्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आवेदन पत्रों और संलग्न दस्तावेजों की गहन जांच की जाए।
बैठक में जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य समाज के जरूरतमंद, कमजोर और पात्र वर्गों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। संबंधित विभागीय अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पात्र लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। वहीं, योजना का लाभ लेने के लिए प्रस्तुत किए गए अभिलेखों का समुचित सत्यापन किया जाए, जिससे कोई भी अपात्र व्यक्ति गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी सहायता प्राप्त न कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र व्यक्तियों को लाभ दिलाना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी योजनाओं में होने वाली अनियमितताओं और दुरुपयोग को रोकना भी है।
राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में नवीन स्वीकृति के लिए 1,056 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जनपद में इस योजना के अंतर्गत कुल 83,245 पेंशनर हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृद्धजनों को पेंशन के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता समय से उपलब्ध कराई जाए। नए प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्र व्यक्तियों को योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में पेंशन अनेक जरूरतमंद लोगों के लिए आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए पात्र वृद्धजनों को इसका लाभ दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
डीएम ने यह भी निर्देश दिए कि पेंशन के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों के साथ लगाए गए आयु, पहचान और अन्य आवश्यक अभिलेखों की नियमानुसार जांच की जाए। सत्यापन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि आवेदक योजना की निर्धारित पात्रता पूरी करता हो। यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों से संबंधित कोई कमी पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। फर्जी अभिलेखों के आधार पर लाभ लेने के प्रयासों को रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए, जिससे योजना का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक ही पहुंचे।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत भुगतान के लिए लंबित 224 आवेदन पत्रों की समीक्षा की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से लंबित प्रकरणों के निस्तारण में आ रही समस्याओं की जानकारी प्राप्त की और उनके समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और जांच में लाभार्थी पात्र पाया गया है, उनमें भुगतान की कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए। पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े और सरकारी सहायता समय से मिल सके, इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी रखी जाए।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में पात्रता से संबंधित कोई कमी है या जांच के दौरान आवेदक अपात्र पाया जाता है, उनमें नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बिना समुचित सत्यापन के किसी भी आवेदन को स्वीकृति न दी जाए। लंबित प्रकरणों का निस्तारण करते समय पात्रता, दस्तावेजों और निर्धारित नियमों का पूरा ध्यान रखा जाए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सके और सरकारी धन का अनुचित उपयोग न हो।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार उत्पीड़न योजना के अंतर्गत भुगतान के लिए 89 प्रकरण लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए नियमानुसार आवश्यक जांच एवं कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। जिन प्रकरणों में लाभार्थी निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र हैं, उनमें भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाओं का उद्देश्य पीड़ित एवं पात्र व्यक्तियों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना है, इसलिए संबंधित अधिकारी मामलों को गंभीरता से लेते हुए अनावश्यक देरी से बचें।
सामान्य वर्ग शादी अनुदान योजना की समीक्षा के दौरान भुगतान के लिए 29 प्रकरण लंबित होने की जानकारी दी गई। इसी प्रकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 1,016 प्रकरण लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने दोनों योजनाओं के लंबित आवेदनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में पात्रता और संलग्न अभिलेखों का नियमानुसार सत्यापन किया जाए। जांच पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराने की कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि शादी अनुदान और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। ऐसे में आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। विभागीय अधिकारी लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और यह पता लगाएं कि किन कारणों से प्रकरण लंबित हैं। दस्तावेजों की कमी अथवा अन्य औपचारिकताओं से जुड़े मामलों में नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जाए। वहीं, अपात्र पाए जाने वाले आवेदनों पर नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए, जिससे योजनाओं का लाभ सही व्यक्तियों तक पहुंच सके।
बैठक में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एवं अन्य बाल कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त सभी आवेदनों और लंबित प्रकरणों का पारदर्शी तरीके से सत्यापन किया जाए। पात्र बालिकाओं एवं जरूरतमंद परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुरूप योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। आवेदन पत्रों में दी गई जानकारी तथा संलग्न दस्तावेजों की जांच करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर अनियमितता न होने पाए।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन समाज के कमजोर वर्गों को सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसलिए संबंधित विभाग समयबद्ध ढंग से कार्य करते हुए पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करें। योजनाओं का अनुचित लाभ लेने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखा जाए।
जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं के लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। प्रत्येक योजना की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए और भुगतान में देरी के कारणों की पहचान कर उनका समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और आवेदन प्राप्त होने से लेकर सत्यापन, स्वीकृति तथा भुगतान तक की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा किया जाए।
उन्होंने दोहराया कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए अभिलेखों की गहन जांच, पात्रता का सत्यापन और लंबित मामलों की प्रभावी निगरानी आवश्यक है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए संबंधित अधिकारी सतर्कता बरतें और आवश्यक होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रदीप तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध भुगतान, लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
