जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र एवं जरूरतमंद व्यक्तियों तक समय से पहुंचाने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने विभिन्न पेंशन योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा बाल कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए और फर्जी अभिलेखों के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त करने का प्रयास करने वाले अपात्र व्यक्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी आवेदनों और उनके साथ संलग्न दस्तावेजों की गहन जांच की जाए, जिससे किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का मूल उद्देश्य समाज के जरूरतमंद, आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि पात्र लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें समय से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही आवेदन पत्रों के सत्यापन में पूरी सतर्कता बरती जाए, ताकि गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोई व्यक्ति सरकारी योजनाओं का लाभ न उठा सके। जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के साथ ही अधिकारियों को पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।
राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना की समीक्षा के दौरान बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में नवीन स्वीकृति के लिए कुल 1,056 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जनपद में वर्तमान में कुल 83,245 पेंशनर हैं। इस पर जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन करने वाले सभी व्यक्तियों की पात्रता का नियमानुसार सत्यापन किया जाए। पात्र पाए जाने वाले वृद्धजनों को योजना का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न किया जाए।
उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में पेंशन अनेक लोगों के लिए आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसलिए पात्र वृद्धजनों को समय पर पेंशन मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं, आवेदन पत्रों और संलग्न अभिलेखों की समुचित जांच भी आवश्यक है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सत्यापन के दौरान दस्तावेजों की वास्तविकता और पात्रता संबंधी निर्धारित मानकों का ध्यान रखा जाए, ताकि फर्जी अभिलेखों के आधार पर कोई अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ प्राप्त न कर सके। आवेदन की जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने भुगतान के लिए लंबित 224 आवेदन पत्रों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि इन प्रकरणों के निस्तारण में किन कारणों से विलंब हो रहा है और लंबित मामलों को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन आवेदनों में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और लाभार्थी निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र हैं, उनका भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी या पात्रता संबंधी समस्या होने पर नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। जिन आवेदनों में आवेदक अपात्र पाए जाते हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अस्वीकृत किया जाए। पात्र लाभार्थियों के मामलों को बिना कारण लंबित रखना उचित नहीं है। इसलिए संबंधित अधिकारी प्रत्येक लंबित प्रकरण की स्थिति की समीक्षा कर उसका समय से निस्तारण सुनिश्चित करें।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार उत्पीड़न योजना के अंतर्गत भुगतान के लिए 89 प्रकरण लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने इन मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों की जांच और आवश्यक औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। नियमानुसार पात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों को शीघ्र भुगतान उपलब्ध कराया जाए, जिससे उन्हें निर्धारित सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और नियमों का पालन दोनों आवश्यक हैं। प्रत्येक प्रकरण में संबंधित अभिलेखों और पात्रता की जांच करते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए। अधिकारियों को लंबित मामलों की स्थिति पर ध्यान देने और निस्तारण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए गए।
सामान्य वर्ग शादी अनुदान योजना की समीक्षा के दौरान भुगतान के लिए 29 प्रकरण लंबित होने की जानकारी दी गई। इसी प्रकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 1,016 प्रकरण लंबित पाए गए। जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी आवेदनों की स्थिति की समीक्षा कर लंबित रहने के कारणों का पता लगाया जाए। जिन मामलों में पात्रता संबंधी शर्तें पूरी हैं और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध हैं, उनमें नियमानुसार आगे की कार्रवाई करते हुए लाभ उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि शादी अनुदान और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जैसी योजनाएं पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। इसलिए इनके अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। आवेदन पत्रों में दर्ज विवरण और संलग्न दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों की अनदेखी न की जाए और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बैठक में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और अन्य बाल कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त सभी आवेदनों का पारदर्शी ढंग से सत्यापन किया जाए। निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करने वाले लाभार्थियों को समय पर योजना से जोड़ने की कार्रवाई की जाए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक सावधानी बरती जाए।
उन्होंने कहा कि बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए आवेदन पत्रों और अभिलेखों की जांच निर्धारित नियमों के अनुरूप की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही बनाए रखने और सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक के अंत में जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पात्रता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। लंबित आवेदनों का नियमित अनुश्रवण किया जाए और जहां भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, वहां पात्र लाभार्थियों को भुगतान में अनावश्यक विलंब न होने दिया जाए। वहीं, संदिग्ध आवेदनों और दस्तावेजों की गहन जांच कर अपात्र व्यक्तियों द्वारा योजनाओं का लाभ लेने के प्रयासों पर रोक लगाई जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सभी अधिकारी अपने-अपने विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों की समीक्षा करें, कमियों को दूर करें और नियमानुसार कार्रवाई पूरी करें। बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रदीप तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
