ऊसराहार। युवा रामलीला महोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के पंचम दिवस भगवान श्रीराम और केवट के मार्मिक संवाद से लेकर राजा दशरथ के मरण तक की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला के दौरान श्रीराम और केवट के बीच करीब दो घंटे तक चले संवाद ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। भक्ति, प्रेम, समर्पण और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास से ओतप्रोत केवट के संवादों ने पूरे रामलीला परिसर को भक्तिमय बना दिया। वहीं राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया।

रामलीला के मंचन में जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनगमन करते हुए गंगा तट पहुंचे तो वहां उनकी भेंट केवट से हुई। प्रभु श्रीराम को अपनी नाव में बैठाने से पहले केवट ने उनके चरण पखारने की इच्छा व्यक्त की। केवट की भक्ति और सरल भावनाओं को देखकर मंच पर मौजूद कलाकारों ने ऐसा जीवंत अभिनय प्रस्तुत किया कि दर्शक देर तक मंत्रमुग्ध होकर लीला देखते रहे।
केवट और भगवान श्रीराम के बीच हुए संवाद में भक्ति और समर्पण का अद्भुत भाव देखने को मिला। केवट की भूमिका प्रदेश के जाने-माने कलाकार **सोबरन परदेशी** ने निभाई। उन्होंने अपने सधे हुए अभिनय और संवाद अदायगी से केवट के चरित्र को जीवंत कर दिया। जब केवट ने प्रभु श्रीराम से भावुक होकर कहा, **“मैंने तेरे ही भरोसे भगवान गंगा में नैया डाल दई”, तो रामलीला परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा। दर्शक केवट की भक्ति में इस कदर डूब गए कि पूरे वातावरण में भावनाओं की लहर दौड़ गई।
केवट के संवादों में भगवान श्रीराम के प्रति उसकी अटूट आस्था और निष्काम भक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। प्रभु के चरण पखारने की केवट की इच्छा और उसके बाद उन्हें नाव से गंगा पार कराने का प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद, भाव-भंगिमा और अभिनय ने प्रसंग को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शक देर रात तक रामलीला देखते रहे।
इसके बाद लीला का प्रसंग अयोध्या की ओर बढ़ा, जहां भगवान श्रीराम के वन चले जाने के बाद राजा दशरथ पुत्र वियोग में व्याकुल हो उठे। श्रीराम के वियोग में उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। इसी बीच मंत्री सुमंत के वन से वापस लौटने और यह सूचना देने कि भगवान श्रीराम अभी अयोध्या वापस नहीं लौटे हैं, राजा दशरथ की व्यथा और अधिक बढ़ गई।
पुत्र वियोग से टूट चुके दशरथ की पीड़ा का कलाकारों ने बेहद मार्मिक अभिनय किया। श्रीराम को याद करते हुए राजा दशरथ बार-बार व्याकुल होकर “हा राम… हा राम…” कहते रहे। अंततः पुत्र वियोग की पीड़ा सहन न कर पाने के कारण राजा दशरथ धरती पर गिर पड़े और उनके प्राण पखेरू उड़ गए। दशरथ मरण के इस दृश्य ने रामलीला देखने पहुंचे दर्शकों को भावुक कर दिया। कई दर्शकों की आंखों से आंसू छलक पड़े और पूरा वातावरण कुछ देर के लिए गमगीन हो गया।
पंचम दिवस की रामलीला का शुभारंभ मोहरी ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान रामशंकर मिश्रा एडवोकेट ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के स्वरूप की पूजा-अर्चना कर रामलीला के सफल आयोजन की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में जीवन मूल्यों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने वाली जीवंत परंपरा है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग, सेवा, कर्तव्य और माता-पिता के सम्मान की प्रेरणा देता है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन से जुड़े मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में आपसी भाईचारे एवं संस्कारों को मजबूत करते हैं।
रामलीला आयोजन के दौरान युवा रामलीला महोत्सव समिति की ओर से सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्र में योगदान देने वाले कई गणमान्य लोगों को सम्मानित किया गया। समिति की ओर से सुबोध एडवोकेट, आदेश दिवाकर, ऋषि वर्मा, ब्रजेश गुप्ता, सतीश चंद्र गुप्ता, राजा सक्सेना, बूटा सिंह बाथम, पप्पू तिवारी, दिलीप कौशल, प्रांसू गुप्ता, शीलू शर्मा, कप्तान सिंह और बीपी यादव सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह के दौरान समिति पदाधिकारियों ने कहा कि रामलीला के आयोजन में स्थानीय लोगों, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समिति की ओर से सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में युवा रामलीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष संजू बाबू शाक्य, प्रबंधक रवि चक्रवर्ती, महामंत्री अनिल कौशल, राजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष पिंकल गुप्ता शिवाकांत गुप्ता, पंकज यादव, सुधीर कौशल, अनुपम गुप्ता, जीतू कौशल और रवि प्रताप सिंह सहित समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन बीपी सिंह यादव ने किया। रामलीला के भावपूर्ण मंचन के दौरान दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। राम-केवट संवाद और दशरथ मरण के दृश्यों ने पांचवें दिन की रामलीला को विशेष रूप से भावनात्मक बना दिया। देर रात तक चले मंचन के बाद भी दर्शक बड़ी संख्या में मौजूद रहे और कलाकारों के शानदार अभिनय की सराहना की।
