इटावा। सदर विधायक सरिता भदौरिया ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्ष 2016-17 में बड़ी संख्या में पात्र छात्रों की छात्रवृत्ति तक नहीं भेजी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय छात्रों के लिए निर्धारित धनराशि का सही उपयोग नहीं हुआ, जबकि वर्तमान सरकार में पारदर्शिता के साथ प्रत्येक पात्र छात्र तक उसका अधिकार पहुंचाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में विधायक सरिता भदौरिया ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी की गई। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016-17 में इन वर्गों के अनेक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल सका था, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया और छात्रवृत्ति की राशि को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुईं।
विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। अब छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों और भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक गरीब, वंचित और जरूरतमंद छात्र को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना है।
सरिता भदौरिया ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास का आधार है और आर्थिक अभाव किसी छात्र की पढ़ाई में बाधा नहीं बनना चाहिए। इसी सोच के साथ राज्य सरकार लगातार छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और विभिन्न शैक्षिक सहायता योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर उनका लाभ मिले और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय और सबका साथ-सबका विकास की भावना के साथ कार्य कर रही है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में युवाओं तक पहुंच रहा है। विधायक ने दावा किया कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है और विद्यार्थियों का भविष्य अधिक सुरक्षित एवं उज्ज्वल बन रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छात्रवृत्ति और सामाजिक कल्याण योजनाओं का मुद्दा आगामी चुनावी चर्चाओं में भी प्रमुखता से उठ सकता है। ऐसे में सरिता भदौरिया का यह बयान शिक्षा और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।
