ऊसराहार। भरतपुर खुर्द स्थित अद्वैत स्वरूप आश्रम में 38वें वार्षिक संत समागम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न जनपदों और प्रमुख धार्मिक स्थलों से पधारे संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिए। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने संतों की अमृतवाणी का श्रवण कर धर्म, भक्ति और अध्यात्म का लाभ प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला।

समागम को संबोधित करते हुए नंगली साहिब से पधारे अनमोला नंद महाराज ने कहा कि सत्संग और गुरु कृपा ही मनुष्य को जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने का एकमात्र साधन है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की शरण में आने से मनुष्य का अंतःकरण शुद्ध होता है और उसे वास्तविक शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान कालिका माता सुंदरकांड सेवा समिति ऊसराहार द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। सुंदरकांड की मधुर प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजन और चौपाइयों की स्वर लहरियों पर झूमते नजर आए। धार्मिक आयोजन के साथ विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
विधायक प्रतिनिधि ध्रुव यादव कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संत-महात्माओं को श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कराया तथा आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। श्रद्धालुओं और संतों के स्वागत-सत्कार में भी उन्होंने सहयोग किया। आयोजन के दौरान सेवा कार्यों में लगे स्वयंसेवकों की भी सराहना की गई।
समागम में उपजिलाधिकारी ताखा विजय प्रकाश मिश्रा एवं थानाध्यक्ष ऊसराहार नरेंद्र कुमार मिश्रा ने भी सहभागिता की। एसडीएम विजय प्रकाश मिश्रा ने कहा कि संत समागम जैसे आयोजन समाज में भाईचारे, सद्भाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। वहीं थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे धार्मिक आयोजनों को सकुशल संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
इटावा के श्यामाधार ब्रह्मचारी ने अपने प्रवचन में कहा कि सनातन संस्कृति समाज को एकसूत्र में बांधने का कार्य करती है और धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का सशक्त माध्यम हैं। संगीता नंद पुरी ने निःस्वार्थ सेवा, भक्ति और करुणा को मानव जीवन का वास्तविक आभूषण बताते हुए लोगों से सेवा भाव अपनाने का आह्वान किया।
देहरादून से पधारे ज्ञान विज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अध्यात्म व्यक्ति को ज्ञान और विज्ञान के बीच संतुलन स्थापित करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और आत्मबल प्रदान करता है। वहीं कन्नौज के सुरेशानंद महाराज और जयपुर के अमर प्रेम सागरानंद महाराज ने प्रेम, सद्भाव और मानवता को ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखता है, तभी वह सच्चे अर्थों में ईश्वर की कृपा का पात्र बनता है।
कार्यक्रम में सेवानंद महाराज (कन्नौज) एवं मोहनानंद शास्त्री (ढकपुरा, भरथना) ने भी श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और सदाचार का संदेश दिया। संतों के प्रेरक प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित किया।
आयोजन को सफल बनाने में राजन सिंह यादव, सुदीप गुप्ता, शशांक मिश्रा, अनिल आचार्य, पप्पू तिवारी, रिंकू शास्त्री, बीपी यादव, अनुज गुप्ता, रवि चक्रवर्ती, अनिल कौशल, प्रशांत तिवारी, आरिफ खान, अनिल गुप्ता, रमेश प्रजापति, बाबी बाथम, मोहित ठाकुर, विसंवर चक्रवर्ती, राजीव गुप्ता, लक्ष्मीकांत गुप्ता, शैलेंद्र गुप्ता, रवी प्रताप, संदीप पाल, शिवाकांत गुप्ता, प्रांसू गुप्ता, विपिन कुमार, आशीष मिश्रा, हरेंद्र दुबे, सुनील, विशाल, कैलाश शाक्य, मोहित, रामू, महिपाल सिंह, रामदास, रोहित, संजू, बाबू शाक्य, रामरतन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों ने योगदान दिया।
समारोह के अंत में आयोजक रामबाबू गुप्ता ने दूर-दराज से पधारे सभी संत-महात्माओं का सम्मान किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
