नई दिल्ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के माध्यम से आज दिल्ली में ‘सुरक्षा संकल्प कार्यशाला’ का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य एचआईवी/एड्स की रोकथाम के लिए प्रभावी उपायों को और सुदृढ़ करना है, जिसमें हरियाणा और दिल्ली की विशेष भागीदारी पर बल दिया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता एनएसीओ के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने की। इस दौरान विशेषज्ञों ने एचआईवी नियंत्रण के लिए बहु-स्तरीय रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
एनएसीओ के डॉ. एसपी भावसार (पीएचएस ग्रुप-I) ने अपने संबोधन में मजबूत डेटा विश्लेषण, लक्षित पहुंच और सुदृढ़ सेवा वितरण ढांचे पर आधारित जिला-स्तरीय रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म योजना के जरिए ही एचआईवी/एड्स नियंत्रण में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

अपने मुख्य भाषण में डॉ. राकेश गुप्ता ने एचआईवी/एड्स को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि इसके नियंत्रण के लिए सभी स्तरों पर सतत सतर्कता, नवाचार और समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने वैश्विक 95:95:95 लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य 95 प्रतिशत संक्रमित लोगों की पहचान, 95 प्रतिशत को निरंतर एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से जोड़ना और 95 प्रतिशत में वायरल दमन सुनिश्चित करना है, जिससे संक्रमण में कमी लाई जा सके।
उन्होंने वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दिल्ली में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं, जहां पहचाने गए लोगों में से केवल लगभग 70 प्रतिशत ही उपचार से जुड़े हैं। इसके विपरीत, हरियाणा ने 81:83:95 का अनुपात हासिल कर बेहतर प्रगति दर्ज की है।

डॉ. गुप्ता ने मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण को समाप्त करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान होने वाले संक्रमण को समय पर जांच, परामर्श और उपचार से पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने प्रसवपूर्व जांच को मजबूत करने और रोकथाम सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई, ताकि एचआईवी संक्रमित बच्चों के जन्म को रोका जा सके।
राष्ट्रीय परिदृश्य का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में 219 जिलों को एचआईवी/एड्स के गहन प्रबंधन के लिए प्राथमिकता वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनमें 11 हरियाणा और 7 दिल्ली में हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वयस्क एचआईवी संक्रमण दर 0.33 प्रतिशत है, जहां अनुमानित 59,079 लोग संक्रमित हैं, जबकि हरियाणा में यह दर 0.24 प्रतिशत है, जहां करीब 59,642 लोग एचआईवी से प्रभावित हैं।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच और निरंतर उपचार सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं।
