9वां जलीय वन्यजीव जीवविज्ञान एवं संरक्षण स्कूल संपन्न, देश-विदेश के 15 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण

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सफारी पार्क में 23 फरवरी 2026 से आयोजित 9वां जलीय वन्यजीव जीवविज्ञान एवं संरक्षण स्कूल छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह कार्यक्रम इटावा सफारी पार्क और TSA Foundation India द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, जिसमें Tata Chemicals Society for Rural Development का आंशिक सहयोग रहा।

इस प्रशिक्षण में भारत के छह राज्यों और नेपाल से कुल 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में एम.एससी. व पीएचडी के छात्र, कॉलेज व्याख्याता तथा प्रोफेशनल फोटोग्राफर शामिल थे। पूरे कार्यक्रम में “कम लेक्चर, ज्यादा फील्ड वर्क” की अवधारणा को अपनाया गया, जिससे प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर सीखने का अधिक अवसर मिला।

कार्यक्रम का उद्घाटन इटावा सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने किया। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी विकास नायक और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की उप वन संरक्षक चांदनी सिंह उपस्थित रहीं। अतिथियों ने नदियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. असद रहमानी ने पक्षियों की पहचान एवं संरक्षण पर विस्तार से जानकारी दी और फील्ड अभ्यास भी कराया। धीरेंद्र सिंह ने ड्रैगनफ्लाई व डैम्सेलफ्लाई (ओडोनेट) की पहचान तथा सैंपलिंग तकनीक सिखाते हुए बताया कि ये मीठे पानी के स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं।

तरुण नायर ने वैज्ञानिक विधि से घड़ियाल गणना की प्रक्रिया समझाई, जिसका प्रतिभागियों ने स्वयं अभ्यास किया। चंबल नदी सफारी के दौरान नदी के पक्षियों और अन्य वन्यजीवों का अवलोकन कराया गया। मेला कोठी लॉज में आर.पी. सिंह ने सतत इको-टूरिज्म और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जानकारी दी।

प्रतिभागियों ने इटावा लायन सफारी का भ्रमण कर वन्यजीव प्रबंधन, बाड़ा डिजाइन और रेस्क्यू व्यवस्था को समझा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के संदीप बेहरा ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण और गंगा पुनर्जीवन कार्यक्रम पर प्रस्तुति दी।

आर.के. शर्मा ने जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन पर सत्र लिया, जबकि प्रो. संत प्रकाश ने जलीय वन्यजीव संरक्षण में जेनेटिक अध्ययन की भूमिका स्पष्ट की। आईआरएस अधिकारी एवं वन्यजीव फोटोग्राफर राघव गुप्ता ने फोटोग्राफी एथिक्स और संरक्षण स्टोरीटेलिंग पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम का समापन मलेशिया के प्रसिद्ध सरीसृप विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनील दास के विशेष व्याख्यान से हुआ।

इस स्कूल में कुल 21 विशेषज्ञों ने कछुए, घड़ियाल, पक्षी, ऊदबिलाव, मछलियां, आर्द्रभूमि प्रबंधन, इको-टूरिज्म, फील्ड सर्वे तकनीक और वन्यजीव फोटोग्राफी जैसे विषयों पर सत्र लिए। प्रतिभागियों को सुविधा डिजाइन, ग्रांट लेखन, फिल्म निर्माण और स्टोरीटेलिंग जैसे समूह कार्य भी सौंपे गए।

टर्टल समूह ने सुविधा डिजाइन प्रतियोगिता जीती, घड़ियाल समूह फिल्म निर्माण में प्रथम रहा और ऊदबिलाव समूह ने ग्रांट लेखन प्रतियोगिता में बाजी मारी। डॉ. मीनाक्षी रेड्डी को सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी चुना गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अनिल कुमार पटेल (निदेशक, इटावा सफारी पार्क), डॉ. शैलेंद्र सिंह (निदेशक, TSA फाउंडेशन इंडिया) और श्रीपर्णा दत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लॉजिस्टिक सहयोग रूपेश श्रीवास्तव, शशांक और पवन पारिक ने प्रदान किया।

यह 9वां जलीय वन्यजीव संरक्षण स्कूल देश की नदियों और जलीय जैव विविधता की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित एवं समर्पित युवाओं का सशक्त नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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