राजनैतिक दल में मीडिया प्रभारी की भूमिका अत्यंत संवेदनशील और जिम्मेदार मानी जाती है। उनका मूल दायित्व होता है कि वे पार्टी और सरकार का पक्ष शालीनता, तथ्यों और सकारात्मक सोच के साथ जनता के समक्ष रखें, न कि ऐसे कदम उठाएं जिससे स्वयं उनकी ही सरकार और नेताओं को बार-बार असहज स्थिति का सामना करना पड़े। इटावा में भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी रोहित शाक्य को लेकर इन दिनों इसी तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

यदि बहुत पीछे न भी जाया जाए और केवल उनके हाल ही के दिनों की फेसबुक पोस्टों को ही गंभीरता से देखा जाए, तो उनकी कार्य क्षमता को परखना कठिन नहीं है। सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम समर्थकों तक को असमंजस में डाल दिया है कि आखिर भाजपा के मीडिया प्रभारी का उद्देश्य क्या है—पार्टी को मजबूती देना या अनजाने में नुकसान पहुंचाना।

हाल ही में “डरपोक मोदी?” जैसे भ्रामक और गुमराह करने वाले वीडियो थंबनेल को अपनी प्रोफाइल पर साझा करना उनकी नासमझी का उदाहरण बताया जा रहा है। ऐसे शब्द और दृश्य भाषा सामान्यतः विपक्ष द्वारा सत्ताधारी दल को घेरने के लिए इस्तेमाल की जाती है, लेकिन जब यही सामग्री सत्ताधारी दल का मीडिया प्रभारी साझा करे, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजिमी है।
इतना ही नहीं, अपनी ही सरकार के अधिकारियों के निलंबन से जुड़ी खबरों को खुले तौर पर शेयर करना भी लोगों को हैरान कर रहा है। आमतौर पर इस प्रकार की खबरें विपक्षी दलों के नेता और प्रवक्ता प्रसारित करते हैं, ताकि वे जनता को यह विश्वास दिला सकें कि सरकार में भ्रष्टाचार या अव्यवस्था है। इटावा में यह काम विपक्ष को करने की जरूरत ही नहीं पड़ रही, क्योंकि भाजपा के मीडिया प्रभारी ही यह भूमिका निभाते नजर आ रहें है।

जानकारों का मानना है कि मीडिया प्रभारी का कार्य विपक्षी तेवर अपनाना नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और योजनाओं को जनता तक पहुंचाना होता है। लेकिन रोहित शाक्य की पोस्टों पर अक्सर भाजपा के ही कार्यकर्ता सवाल खड़े करते दिखाई देते हैं, जो किसी भी संगठन के लिए चिंताजनक संकेत है।
सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट के नीचे की टिप्पणियों की भाषा और लहजा भी कई बार विपक्षी प्रवक्ताओं जैसा प्रतीत होता है। इससे न केवल पार्टी की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता के बीच भी यह संदेश जाता है कि पार्टी के अंदर ही समन्वय और स्पष्ट सोच का अभाव है।
मीडिया प्रभारी का एक अहम दायित्व जिले के मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के साथ स्वस्थ और सकारात्मक संबंध बनाना भी होता है, ताकि सरकार और संगठन की बात सही ढंग से जन-जन तक पहुंचे। लेकिन इटावा में यह भूमिका निभाने के बजाय, टकराव और व्यक्तिगत टिप्पणियों की प्रवृत्ति अधिक दिखाई दे रही है।
विगत दिनों रोहित शाक्य द्वारा “इटावा लाइव” पर किया गया व्यक्तिगत हमला भी चर्चा का विषय रहा। उन्होंने तंज कसते हुए यह लिखा कि इटावा लाइव पर केवल एक-दो लोगों की ही इंगेजमेंट आती है। टिपण्णी करते समय रोहित शाक्य यह भूल गए की दो लाख से अधिक पाठकों और दर्शकों वाले इटावा लाइव को उन्होंने अब तक सरकार और पार्टी की एक भी सकारात्मक ख़बर उपलब्ध नहीं कराईं।
