बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन 111वें दिन भी जारी, निजीकरण पर उठाए गंभीर सवाल

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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन लगातार 111वें दिन भी जारी रहा। सभी जनपदों, परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ में बिजली कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इटावा में अधीक्षण अभियंता कार्यालय में संघर्ष समिति के संयोजक विवेक कुमार सिंह (SDO), सह-संयोजक आनंद पल (SDO), अधिशाषी अभियंता HP मिश्रा, सचिव गगन अग्निहोत्री (SDO), राहुल कुमार, पीयूष मौर्य (SDO), अवर अभियंता संघ सचिव वीरेंद्र, बाबू संवर्ग के सचिव राम जी, TG2 संघ सचिव मदन यादव सहित अन्य बिजली कर्मचारियों ने विरोध सभा आयोजित की।

संघर्ष समिति ने बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि “कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट” (हितों के टकराव) के प्रावधान को हटा दिया गया है। पहले आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) दस्तावेज़ में यह प्रावधान शामिल था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ गई है। समिति ने मांग की कि सरकार को इस संबंध में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि अर्नेस्ट एंड यंग, ग्रैंड थ्रामटन और डेलॉइट जैसी कंपनियों ने ट्रांजैक्शन कंसलटेंट के लिए बोली लगाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये कंपनियां कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के दायरे में आती हैं या नहीं। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति” का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण में इस नीति की अवहेलना की जा रही है।

संघर्ष समिति ने चार मुख्य बिंदुओं को उजागर किया, जो बिजली के निजीकरण में घोटाले की ओर संकेत कर रहे हैं:

  1. कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के प्रावधान को हटाना।
  2. पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की परिसंपत्तियों के निजीकरण से पहले कोई मूल्यांकन नहीं किया गया।
  3. 42 जनपदों के बिजली वितरण का राजस्व क्षमता (Revenue Potential) सार्वजनिक किए बिना निजीकरण किया जा रहा है।
  4. 66000 करोड़ रुपये का बकाया राजस्व यदि वसूल लिया जाए, तो कंपनियां मुनाफे में आ सकती हैं, फिर भी उनका निजीकरण किया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने आगरा की टोरेंट पावर कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि 15 साल पहले 2200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली का समझौता हुआ था, लेकिन आज तक एक भी पैसा वापस नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे 66000 करोड़ रुपये के बकाया राजस्व पर निजी कंपनियों की नजर है। इसी मुद्दे को लेकर वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभाएं आयोजित की गईं । संघर्ष समिति ने कहा कि यह लड़ाई जारी रहेगी और निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे।

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