किसान सभा की जिला परिषद की बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि व्यापक अभियान चलाकर 15 मई को प्रदेशव्यापी कार्यवाहियों के तहत इटावा कचहरी पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत गांवों में सघन प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिसमें 25 हजार सदस्यता भर्ती और डेढ़ लाख रुपये का फंड एकत्रित किया जाएगा। इससे पहले गांव कमेटियों का गठन और मंडलों (क्षेत्रीय कमेटियों) के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
प्रांतीय महामंत्री कामरेड मुकुट सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि खेती-किसानी के गहराते कृषि संकट के लिए डबल इंजन सरकारों की किसान-मजदूर विरोधी और पूंजीपतिपरस्त नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि मोदी-योगी सरकारों ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की है और उनके साथ धोखा किया है। इस साल के बजट भी इस सच्चाई को उजागर करते हैं।
कामरेड मुकुट सिंह ने आगे बताया कि किसान सभा की प्रांतीय परिषद की बैठक में 1-2 मार्च को यह निर्णय लिया गया कि जिला मुख्यालयों पर तैयारी के साथ 15 मई को बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में बिजली निजीकरण का विरोध, स्मार्ट मीटर योजना की वापसी, अन्यायपूर्ण भूमि अधिग्रहण पर रोक, और कृषि बाजार पर राष्ट्रीय नीति का मसौदा वापस लेने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि यह कृषि बाजार नीति किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन और कुर्बानियों से वापस लिए गए तीन काले कृषि कानूनों को नए रूप में लागू करने की साजिश है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
जिलामंत्री संतोष शाक्य ने समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य स्तरीय फैसलों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर भी जुझारू आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पतालों की दुर्दशा, चक रोड, सिंचाई नालियों पर अवैध कब्जा, आनैया और पुरा नदियों की सफाई, सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार, बढ़ते अपराध और नफरत की राजनीति के खिलाफ भी संघर्ष जारी रहेगा।
इस बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रामबृजेश यादव ने की। इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, अमर सिंह शाक्य, अध्यक्ष रामवरन यादव, जिला संयुक्त मंत्री संतोष राजपूत सहित जिला कार्यकारिणी और काउंसिल के सदस्य उपस्थित रहे।
