महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने समानता, सहभागिता और सहकार को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक बताया। सिरसागंज के राजकीय महाविद्यालय से आई आचार्य प्रो. कान्ति शर्मा ने कहा कि कोई भी समाज तभी उन्नति कर सकता है जब स्त्री और पुरुष सहगामी हों और सामंजस्य का व्यवहार करें। उन्होंने कार्य विभाजन को समय की मांग के अनुरूप करने पर जोर दिया, जिससे सहकार और साहचर्य बना रहे।
दूसरे दिन के पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए जनता महाविद्यालय, अजीतमल के प्राचार्य प्रो. ए.के. शर्मा ने कहा कि यदि हम अपने परिवार में समानता का व्यवहार अपनाएं तो स्त्री सशक्तिकरण स्वतः हो जाएगा। जनता महाविद्यालय, बकेवर के प्राचार्य डॉ. राजेश किशोर त्रिपाठी ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से महिलाओं की सहभागिता बढ़ाकर सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
राजकीय महाविद्यालय, इटावा की अंग्रेजी प्रोफेसर डॉ. रेखा ने कहा कि हमें कामिनी और दामिनी के मध्य संतुलन को ध्यान में रखना होगा, जिससे सशक्तिकरण का सही स्वरूप उभर सके।कर्मक्षेत्र महाविद्यालय के डॉ. प्रकाश दुबे ने सम्मान के साथ सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर बल दिया।सेमिनार में विभिन्न शिक्षाविदों और छात्रों ने हिस्सा लिया और महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।
