इटावा, 11 फरवरी : टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्यों ने कचहरी में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में यह अवगत कराया गया कि राज्यकर विभाग के अपर सचिव की कार्यप्रणाली से प्रांत के कारोबारी और अधिवक्ता मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। वर्तमान समय में अपर प्रमुख सचिव द्वारा माल एवं सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों और निस्तारण की तिथि के विषय में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है।
प्रांत के समस्त एडिशनल कमिश्नर ग्रेट वन ने अपर प्रमुख सचिव राज्यकर विभाग द्वारा जारी निर्देश का पालन करते हुए एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें माल एवं सेवाकर अधिनियम के अंतर्गत के वादों की स्कूटनी के बाद आदेश जारी करने की अंतिम तारीख 28 फरवरी के बजाय 10 फरवरी तक निस्तारण किए जाने का फरमान जारी किया गया है। यह आदेश विधिक रूप से अपर प्रमुख सचिव के क्षेत्राधिकार से बाहर है।
टैक्स बार एसोसिएशन का कहना है कि माल एवं सेवा कर अधिनियम के तहत किसी भी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हस्तक्षेप करके विज्ञप्ति में संशोधन करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इस प्रकार के निर्देश विधि और नर्सिग सिद्धांतों के विपरीत हैं, और यह वास्तव में व्यापारियों और अधिवक्ताओं के लिए मानसिक, आर्थिक और सामाजिक उत्पीड़न का कारण बन रहे हैं।
एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सकारात्मक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि व्यापारियों और अधिवक्ताओं के उत्पीड़न की कार्यवाही रोकी जा सके। एसोसिएशन का यह भी विश्वास है कि प्रशासन व्यापारियों और अधिवक्ताओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण रखेगा और इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द करेगा।
ज्ञापन देने वालों में एड. हरि हरि नारायण, एड. इंद्रेश दीक्षित, एड. जितेन्द्र कुमार पोरवाल, एड. ऋषि पोरवाल, एड. सोनू वर्मा, एड. देवेन्द्र भदौरिया, एड. गौरव अग्रवाल आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
