रविवार को साप्ताहिक बंदी के कारण शहर के मुख्य बाजार बजाजा लाइन में खुले हुए बाजारों को बंद कराने के लिए लेबर विभाग की टीम पहुंची। टीम ने बाजार की दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया, जिस पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित सहित स्थानीय व्यापारियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित ने लेबर विभाग की टीम के सामने अपना विरोध जताते हुए कहा कि शादियों का सीजन चल रहा है और ऐसे में दुकानों को बंद कराना व्यापारियों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा, “शॉपिंग मॉल और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म 24 घंटे और 365 दिन खुले रहते हैं, जबकि रिटेल दुकानों को बंद कराया जा रहा है। यह दोहरी नीति पूरी तरह से गलत है। यदि साप्ताहिक बंदी आवश्यक है, तो सभी को बंद होना चाहिए, नहीं तो रिटेल दुकानों पर भी कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए।”
दीक्षित ने आगे कहा कि साप्ताहिक बंदी का नियम मजदूरों को अवकाश देने के लिए बनाया गया था, लेकिन अधिकारियों ने इसे एक अंधा कानून बना दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकांश रिटेल दुकानों पर परिवार के सदस्य जैसे पिता-पुत्र या भाई-भाई मिलकर काम करते हैं, जिसमें मजदूरों का कोई मुद्दा नहीं होता। उन्होंने कहा, “अधिकारियों का काम नियमों का पालन करवाना है, न कि अपने स्तर पर नए नियम बनाकर व्यापारियों पर थोपना।”
इस मुद्दे पर व्यापार मंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि अधिकारी व्यापारियों के साथ उत्पीड़न जैसा व्यवहार करते रहे, तो वे इसके खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। व्यापारियों ने मांग की कि साप्ताहिक बंदी के नियमों को लेकर सरकार को स्पष्ट और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए, जो सभी के लिए समान हो।
