चंबल नदी में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का असर

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इटावा। चंबल नदी में वन्य जीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सर्दियों के मौसम में नदी के किनारों पर मगरमच्छ और घड़ियाल धूप सेंकते हुए देखे जा रहे हैं। उदी से पचनद संगम तक के क्षेत्र में इन जलीय जीवों ने भरेह संगम, रावनी, पथर्रा, लालपुरा, सहसों, बरेछा, कसौआ और खेड़ा अजब सिंह जैसे स्थानों को अपना ठिकाना बनाया है।

वन्य जीव विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022 की तुलना में 2023 में घड़ियालों और मगरमच्छों की संख्या में वृद्धि हुई है। 2022 में जहां घड़ियालों की संख्या 1,872 थी, वहीं 2023 में यह बढ़कर 1,887 हो गई। इसी तरह, मगरमच्छों की संख्या 594 से बढ़कर 608 तक पहुंच गई है। यह वृद्धि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मानी जा रही है।

चंबल नदी में डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ी है। 2022 में इनकी संख्या 147 थी, जो 2023 में बढ़कर 151 हो गई है। यह चंबल नदी के इकोसिस्टम के बेहतर होने का संकेत है और इन दुर्लभ जलीय जीवों के लिए सुरक्षित आवास की पुष्टि करता है।

सर्दियों के मौसम में चंबल नदी के किनारे धूप सेंकते हुए मगरमच्छ और घड़ियाल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह नजारा वन्य जीवन की अद्भुत विविधता और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।वन्य जीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चंबल नदी में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि का श्रेय संरक्षण योजनाओं, बेहतर निगरानी और जागरूकता अभियानों को दिया जा सकता है।

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