इटावा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जनधन योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना के तहत खोले गए 20 हजार से अधिक बैंक खाते निष्क्रिय हो चुके हैं। इन खातों में से कई खाताधारकों के एक से अधिक खाते थे, तो कुछ खातों में दो साल से कोई लेन-देन न होने के कारण वे बंद हो गए हैं।
पोईएम जन धन योजना के तहत बैंकों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को खाते खोलने के लिए प्रेरित किया था। पहले चरण में हर घर में एक बैंक खाता खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में हर घर के सभी सदस्यों को बैंक खाता खोलने के प्रयास किए गए थे। 2014 से अब तक इस योजना के तहत जिले में लोगों के खाते खोले जाते रहे हैं।
जिले में 31 दिसंबर 2024 तक कुल 42,748 बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिसमें युवाओं के खाते भी शामिल हैं। हालांकि, वर्तमान में जिले में केवल 21,820 बैंक खाते ही सक्रिय हैं, जबकि बाकी के 20,928 खाते निष्क्रिय हो चुके हैं। इन खातों में दो साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है और बाकी खातों में भी लेन-देन नाममात्र का 1000 रुपये का लेन-देन हुआ है।
वहीं, कुछ खाताधारकों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे खातों का उपयोग नहीं करते हैं, क्योंकि उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पहले से ही अन्य बैंकों के खातों से पूरी हो रही हैं। इसके अलावा, कई खातों में न्यूनतम राशि जमा होने के कारण इन्हें सक्रिय रखना भी मुश्किल हो गया है।
यह स्थिति जनधन योजना की सफलता पर सवाल खड़े करती है। सरकार को अब इस योजना की कार्यक्षमता और लोगों के बीच इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठाने होंगे, ताकि इस योजना का उद्देश्य सही तरीके से पूरा हो सके और ज्यादा से ज्यादा लोग इसके लाभ से जुड़ सकें।
