लखनऊ/अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी 7 नवंबर 2026 को अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। दीपोत्सव के दसवें संस्करण को भव्य स्वरूप देने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि इस वर्ष राम की पैड़ी सहित संपूर्ण अवधपुरी को लाखों दीपों से आलोकित किया जाए। आयोजन में धार्मिक गरिमा, सांस्कृतिक परंपराओं और अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान का विशेष ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुविधा, सुरक्षा तथा सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरी की जाएं। प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और मार्गदर्शन के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग ले सकें।इस वर्ष दीपोत्सव के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजन को विशेष रूप देने की तैयारी है। कार्यक्रम में सरयू आरती, रामायण पर आधारित आकाशीय प्रस्तुति, 3D प्रोजेक्शन, लेजर शो और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण होंगी।
दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में 2,100 स्वदेशी ड्रोनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाने वाला आकाशीय शो शामिल है। इस प्रस्तुति के जरिए आसमान में रामायण से जुड़े प्रसंगों को आकर्षक दृश्य स्वरूप में प्रदर्शित करने की योजना है। इसके साथ ही 3D प्रोजेक्शन, लेजर प्रस्तुति और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन की भव्यता को बढ़ाएंगे।
सरयू तट पर आयोजित होने वाली आरती में 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। वहीं, राम की पैड़ी पर लगभग 200 कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। दीपों की रोशनी से जगमगाती रामनगरी, धार्मिक अनुष्ठान और आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रस्तुतियां दीपोत्सव के दसवें संस्करण को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करेंगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यक्रमों की तैयारियां निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएं और आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था में गुणवत्ता एवं समन्वय का ध्यान रखा जाए।
दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया। प्रस्तावित कार्यक्रम तीन प्रमुख चरणों में आयोजित किए जाएंगे।
- पहला चरण — साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा: रामायण के विभिन्न प्रसंगों और भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों पर आधारित झांकियों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
- दूसरा चरण — रामकथा पार्क में धार्मिक आयोजन: यहां भगवान श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों का प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- तीसरा चरण — सरयू आरती और दीप प्रज्ज्वलन: सरयू तट पर आरती, दीपोत्सव, राम की पैड़ी पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, 2,100 ड्रोनों का आकाशीय शो, लेजर प्रस्तुति, गोंडा पुल के समीप हरित आतिशबाजी और अंतरराष्ट्रीय रामलीला का मंचन प्रस्तावित है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से अयोध्या की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना है।
दीपोत्सव में देश की विविध लोककलाओं और नृत्य परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए उत्तर प्रदेश सहित 13 राज्यों के लगभग 1,000 कलाकारों के शामिल होने की योजना है। इनमें मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के कलाकार शामिल होंगे।
कलाकार अपनी-अपनी क्षेत्रीय लोककलाओं, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता को सामने रखेंगे। इसके अतिरिक्त 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता भी प्रस्तावित है। भारत में तैनात विदेशी राजदूतों तथा विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को भी आयोजन के लिए आमंत्रित किए जाने की योजना है।
डिजिटल माध्यमों के जरिए दीपोत्सव को पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इससे अयोध्या के सांस्कृतिक आयोजन को देश-विदेश में व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दीपोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने से पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पदाधिकारियों और अयोध्या के पूज्य संतों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने आयोजन में स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोजन की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं की जाएं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें।
दीपोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और आवश्यक मार्गदर्शन की व्यवस्थाओं को विशेष महत्व दिया गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री ने आगामी 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश के सभी जनपदों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए। इसके तहत मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ, रामायण आधारित प्रस्तुतियां और चित्रकला गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के योगदान, रामायण की सांस्कृतिक विरासत और भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जनपदों में इन गतिविधियों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान चित्रकूट स्थित रामघाट के विकास और वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के विषय पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुधार कार्य तेजी से पूरे किए जाएं, ताकि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही दुकानों के व्यवस्थित पुनर्वास, नालों के सुदृढ़ीकरण और तुलसी चबूतरे के विकास कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों के दौरान क्षेत्र की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता और स्थानीय जनभावनाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने भविष्य में बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख आयोजन है। दसवें संस्करण की तैयारियों के तहत दीप प्रज्ज्वलन, सरयू आरती, रामायण आधारित प्रस्तुतियों और विभिन्न राज्यों के कलाकारों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के समन्वय और विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर दिया गया। दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है।
7 नवंबर को आयोजित होने वाला दीपोत्सव अयोध्या में दीपों की रोशनी, सरयू आरती, रामायण की झांकियों और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम होगा। वहीं, महर्षि वाल्मीकि जयंती के आयोजन और चित्रकूट के रामघाट के विकास को लेकर दिए गए निर्देश प्रदेश में धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
