इटावा, 18 अक्टूबर। घर-आंगन में फिर से नन्ही गौरैया की चहचहाहट सुनाई दे और पक्षियों को सुरक्षित आशियाना मिल सके, इसी उद्देश्य से ईको विंग्स फाउंडेशन, इटावा की ओर से रविवार को ‘हर घर घोंसला, हर घर गौरैया’ अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के तहत घर-घर जाकर गौरैया के लिए कृत्रिम घोंसले लगाए जाएंगे और उनके भोजन की व्यवस्था के लिए बर्ड फीडर स्थापित किए जाएंगे। अपर जिलाधिकारी श्री विनय कुमार ने सुबह 11:15 बजे अपने कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर गौरैया रक्षक टीम को रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य गौरैया संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और शहर के घरों में पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
अभियान के शुभारंभ अवसर पर अपर जिलाधिकारी श्री विनय कुमार ने ईको विंग्स फाउंडेशन की संस्थापक एवं सचिव डॉ. सुनीता यादव और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आजकल पहले की तुलना में बहुत कम घरों और आंगनों में गौरैया दिखाई देती है। गौरैया हमारे प्राकृतिक पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। ऐसे में डॉ. सुनीता यादव और उनकी टीम द्वारा गौरैया संरक्षण के लिए चलाया जा रहा यह अभियान सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से लोगों को अपने घरों में गौरैया के लिए सुरक्षित आशियाने बनाने की प्रेरणा मिलेगी और पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनीता यादव ने अपर जिलाधिकारी को गौरैया के लिए तैयार किया गया सुंदर आवास, बर्ड फीडर और अपनी पुस्तक ‘गौरैया फिर लौट आई’ भेंट की। उन्होंने गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि वह वर्ष 2016 से लगातार इस दिशा में कार्य कर रही हैं। गौरैया को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और आम लोगों को उसके संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से अब इस अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत गौरैया रक्षक टीम शहर की अलग-अलग कॉलोनियों में पहुंचकर लोगों को जागरूक करेगी और घरों में कृत्रिम घोंसले तथा बर्ड फीडर लगाएगी।
डॉ. सुनीता यादव ने बताया कि अभियान के अंतर्गत लगाए जाने वाले बर्ड फीडरों में कंगुनी के दाने रखे जाएंगे, ताकि गौरैया को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध हो सके। उनका प्रयास है कि घरों में रहने वाले लोग भी पक्षियों के लिए दाना-पानी और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी समझें। उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह के तीसरे रविवार को इटावा शहर की एक नई कॉलोनी में यह अभियान चलाया जाएगा। शुरुआत में अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा और धीरे-धीरे इस पहल को पूरे शहर के घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के शुभारंभ के बाद गौरैया रक्षक टीम कृष्णापुरम कॉलोनी स्थित लुहन्ना चौराहा पहुंची। यहां भाजपा नेता श्री नवल शुक्ल के आवास से अभियान की शुरुआत की गई। टीम के सदस्यों ने कॉलोनी के विभिन्न घरों में गौरैया के लिए कृत्रिम घोंसले लगाए और कंगुनी के दाने से भरे बर्ड फीडर स्थापित किए। इस दौरान स्थानीय लोगों ने अभियान में रुचि दिखाई और गौरैया के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। टीम ने लोगों को समझाया कि घरों में छोटे-छोटे प्रयास करके भी पक्षियों के जीवन को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
डॉ. सुनीता यादव ने कहा कि ‘हर घर घोंसला, हर घर गौरैया’ अभियान का उद्देश्य केवल घोंसले लगाने और दाना-पानी की व्यवस्था करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार को प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने घरों में गौरैया के लिए सुरक्षित स्थान बनाएंगे और नियमित रूप से उनके भोजन-पानी का ध्यान रखेंगे, तभी इस प्रयास को व्यापक सफलता मिल सकेगी। बच्चों और युवाओं को भी पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के महत्व को समझें और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं।
अभियान में गौरैया रक्षक टीम के सदस्य डॉ. नरेश कुमार, अर्चना सिंह, आभा पुरवार, संजय मिश्र, पूजा सिंह, संगीता जैन, ऋषभ त्रिवेदी, रूपम सक्सेना, गिरीश चंद्र दीक्षित, सोबरन सिंह, सुभाष चंद्र, ललित सक्सेना, सर्वेश यादव, बृजेश कुमार, संजीव कुमार गुप्ता और दाऊ दयाल वर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने गौरैया संरक्षण के संदेश को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाने और अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
ईको विंग्स फाउंडेशन की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब शहरी क्षेत्रों में पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले और भोजन-पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना पर्यावरण संरक्षण का अहम हिस्सा बन गया है। अभियान के माध्यम से इटावा के प्रत्येक घर में गौरैया के लिए सुरक्षित आशियाना तैयार करने, दाना-पानी की व्यवस्था विकसित करने और लोगों को पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। संस्था को उम्मीद है कि शहरवासियों के सहयोग से यह मुहिम व्यापक रूप लेगी और इटावा के घरों, छतों तथा आंगनों में एक बार फिर गौरैया की चहचहाहट सुनाई देने लगेगी।
