लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पांचवें दीक्षांत समारोह में सहभागिता की। इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षा, न्याय, संविधान और विधि के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका तथा विकसित भारत के निर्माण में संवैधानिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर समारोह से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए विश्वविद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हमारा संविधान है। संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप व्यवस्था का संचालन करना लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेश में कानून के शासन यानी ‘रूल ऑफ लॉ’ को संविधान की मूल भावना के अनुरूप लागू करने के लिए डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।
पांचवें दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जहां वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अध्ययन के बाद वे अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ आगे की व्यावसायिक यात्रा की ओर कदम बढ़ाते हैं।
विधि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा भविष्य में न्यायिक सेवा, विधि व्यवसाय, प्रशासन, शोध और अन्य क्षेत्रों के माध्यम से समाज एवं देश की सेवा कर सकते हैं। ऐसे में शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए विद्यार्थियों का सम्मान उन्हें उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाना विधि शिक्षा और न्याय व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण संबंध को भी रेखांकित करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में संविधान के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हमारा संविधान है। संविधान देश की शासन व्यवस्था, नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संचालन का आधार है।
संविधान में निहित आदर्शों के अनुरूप शासन व्यवस्था को संचालित करना और नागरिकों को न्याय उपलब्ध कराना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रमुख जिम्मेदारी है। विधि विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए संविधान की समझ और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कानून के विद्यार्थियों को भविष्य में न्याय व्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभानी होती है। ऐसे में संवैधानिक सिद्धांतों की समझ उनके व्यावसायिक जीवन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी उपयोगी होती है।
मुख्यमंत्री के संदेश में संविधान को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया गया कि देश की प्रगति के लिए मजबूत संवैधानिक व्यवस्था, कानून का सम्मान और न्यायपूर्ण शासन महत्वपूर्ण आधार हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने संविधान की मूल भावना के अनुरूप प्रदेश में ‘रूल ऑफ लॉ’ को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया है। कानून का शासन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसके अंतर्गत कानून के अनुसार व्यवस्था का संचालन और न्याय की प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है।
विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कानून के शासन का उल्लेख विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है। कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे न्याय, निष्पक्षता, संवैधानिक मूल्यों और विधिक प्रक्रिया के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। न्याय व्यवस्था में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है।
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को सामने रखा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में संविधान की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।
समारोह के संदर्भ में साझा किया गया संस्कृत वाक्य ‘सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः।’ सत्य बोलने, धर्म के मार्ग पर चलने और अध्ययन में लापरवाही न करने की प्रेरणा देता है। यह संदेश विशेष रूप से विधि शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए प्रासंगिक है, क्योंकि न्याय और कानून के क्षेत्र में सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता तथा निरंतर अध्ययन का विशेष महत्व है।
विधि के विद्यार्थियों के लिए डिग्री प्राप्त करना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। कानून की जानकारी का उपयोग नागरिकों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है। दीक्षांत समारोह इसी दिशा में विद्यार्थियों को प्रेरित करने का अवसर प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति और संविधान के महत्व पर चर्चा कार्यक्रम के प्रमुख पहलू रहे।
समारोह ने विधि शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन की अहमियत को सामने रखा। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में संविधान की भूमिका केंद्रीय है और संवैधानिक भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था का संचालन आवश्यक है। वहीं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के हित में करने के लिए प्रेरित करता है।
