ऊसराहार। कस्बा ऊसराहार में इस बार रामलीला प्रेमियों और श्रद्धालुओं को दो बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद देखने का अवसर मिलेगा। श्रीराम लीला महोत्सव समिति ऊसराहार के तत्वावधान में आयोजित होने वाले दस दिवसीय रामलीला महोत्सव का शुभारंभ 22 अक्टूबर को गणेश पूजन एवं शिव बारात के साथ किया जाएगा। इसके बाद 23 अक्टूबर से रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन शुरू होगा, जो एक नवंबर तक चलेगा। महोत्सव में भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर रावण वध और राम राज्याभिषेक तक की प्रमुख लीलाओं का मंचन किया जाएगा। आयोजन को आकर्षक बनाने के लिए अच्छे कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।

श्रीराम लीला महोत्सव समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी रामलीला महोत्सव की तैयारियां की गई हैं। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। दस दिवसीय कार्यक्रम में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दर्शक भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को देख सकेंगे। समिति का प्रयास है कि रामलीला के माध्यम से धर्म, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का संदेश जन-जन तक पहुंचे।
महोत्सव की शुरुआत 22 अक्टूबर, गुरुवार को गणेश पूजन एवं शिव बारात के साथ होगी। इसके बाद 23 अक्टूबर से रामलीला का नियमित मंचन प्रारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान नारद मोह, राम जन्म, ताड़िका वध, पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ और सीता-राम विवाह जैसे प्रमुख प्रसंगों का मंचन होगा। इन लीलाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के बाल जीवन, ऋषि-मुनियों की रक्षा, माता सीता से उनके विवाह और रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
रामलीला के आगामी प्रसंगों में कैकेयी के वरदान, राम वनवास, केवट संवाद और भरत मिलाप का मंचन भी किया जाएगा। इन प्रसंगों में पारिवारिक संबंधों, त्याग, प्रेम, भाईचारे और कर्तव्य पालन की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देगी। भगवान श्रीराम का वनवास, केवट की भक्ति और भरत का अपने भाई के प्रति समर्पण रामायण के ऐसे प्रसंग हैं, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं। समिति को उम्मीद है कि इन लीलाओं के मंचन से दर्शकों को धार्मिक और नैतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलेगा।
आयोजन के दौरान सीता हरण, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन जैसे प्रसंग भी प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण वध, मेघनाद वध और रावण वध की लीलाओं का मंचन होगा। रामायण के इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम की धर्म के प्रति निष्ठा, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, मित्रता का महत्व और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष को दर्शाया जाएगा। रावण वध के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी प्रमुख रूप से सामने आएगा।
इस बार रामलीला महोत्सव का विशेष आकर्षण लक्ष्मण-परशुराम संवाद रहेगा। समिति के अनुसार, इस संवाद का मंचन दो अलग-अलग अवसरों पर किया जाएगा। रामलीला के दौरान लक्ष्मण और परशुराम के बीच होने वाला संवाद अपनी ओजपूर्ण वाणी, हास्य और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण दर्शकों के बीच विशेष लोकप्रियता रखता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इसे दो बार प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है। रामलीला के समापन दिवस पर भी लक्ष्मण-परशुराम संवाद दोबारा मंचित किया जाएगा, जिससे दर्शकों को इस चर्चित प्रसंग को फिर से देखने का अवसर मिलेगा।
रामलीला महोत्सव के अंतिम चरण में रावण वध के साथ राम राज्याभिषेक का प्रसंग भी प्रस्तुत किया जाएगा। राम राज्याभिषेक को भगवान श्रीराम के वनवास और संघर्ष के बाद अयोध्या लौटने तथा आदर्श शासन की स्थापना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। समिति का उद्देश्य इन प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों तक यह संदेश पहुंचाना है कि सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य के मार्ग पर चलकर समाज में आदर्श स्थापित किए जा सकते हैं।
समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण आयोजन भी है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, सत्यनिष्ठा, वचन पालन और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। रामलीला के मंचन के जरिए इन आदर्शों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि समिति चाहती है कि दर्शक रामलीला देखकर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा लें।
ऊसराहार में आयोजित होने वाला यह रामलीला महोत्सव 22 अक्टूबर को गणेश पूजन और शिव बारात से शुरू होकर एक नवंबर तक चलेगा। 23 अक्टूबर से रामलीला के नियमित मंचन के साथ रामायण के विभिन्न प्रसंग दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। इस बार दो बार लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन आयोजन को विशेष बनाने वाला है। समिति की ओर से महोत्सव की तैयारियां की गई हैं और बेहतर प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। रामलीला प्रेमियों को अब महोत्सव के शुभारंभ का इंतजार है।
