राजस्व कार्यों की समीक्षा में डीएम सख्त लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश

Share This

जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व विभाग से संबंधित विभिन्न कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान अर्जेंट नकल प्रार्थना पत्रों, राजस्व अभिलेखों, न्यायालयों में लंबित पत्रावलियों, अधिवक्ताओं एवं मुंशियों को अभिलेखों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराने, चरित्र सत्यापन, सरफेसी अधिनियम, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना तथा अन्य राजस्व संबंधी मामलों पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर उनका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व कार्यों में लापरवाही और अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा राजस्व परिषद के कार्यों की मंडल स्तर पर समीक्षा की जा रही है। ऐसे में सभी अधिकारियों को अपने-अपने विभागीय कार्यों में तेजी लाते हुए लंबित मामलों का प्रभावी ढंग से निस्तारण करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि केवल प्रकरणों के निस्तारण की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और जिन प्रकरणों में अभिलेखों अथवा अन्य औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है, उन्हें तत्काल पूरा कराएं।

समीक्षा बैठक में अर्जेंट नकल प्रार्थना पत्रों की स्थिति सामने आने पर जिलाधिकारी ने इनके निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में अर्जेंट नकल के कुल 1,997 प्रकरण लंबित पाए गए। इसके अतिरिक्त अधिवक्ताओं एवं मुंशियों को अभिलेखों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराने से संबंधित 105 प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए, ताकि संबंधित पक्षों को समय से अभिलेख उपलब्ध हो सकें और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि अभिलेखों से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी से आम लोगों और विधिक प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों को दिक्कत होती है, इसलिए इन मामलों में विशेष सतर्कता बरती जाए।

मंडलायुक्त, कानपुर मंडल, कानपुर तथा अन्य न्यायालयों एवं अधिकारियों को भेजी जाने वाली पत्रावलियों की समीक्षा के दौरान कुल 117 प्रकरण लंबित होने की जानकारी दी गई। इनमें अपर आयुक्त, कानपुर मंडल के स्तर पर 104 प्रकरण लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी लंबित पत्रावलियों को तत्काल चिह्नित किया जाए और आवश्यक अभिलेखों के साथ संबंधित न्यायालयों एवं अधिकारियों को भेजने की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि पत्रावलियों को समय से संबंधित स्तर पर भेजना आवश्यक है, ताकि मामलों में आगे की कार्रवाई प्रभावित न हो। संबंधित अधिकारी इस कार्य को प्राथमिकता देते हुए लंबित मामलों की स्थिति पर लगातार नजर रखें।

राजस्व अभिलेखागार में राजस्व वादों से संबंधित दाखिल पत्रावलियों की समीक्षा के दौरान कुल 26,582 प्रकरण लंबित पाए गए। इनमें उपजिलाधिकारी सदर स्तर पर 330 तथा तहसीलदार इटावा स्तर पर 9,896 प्रकरण लंबित होने की जानकारी दी गई। इतनी बड़ी संख्या में लंबित पत्रावलियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इनके निस्तारण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्तरों पर पत्रावलियां लंबित हैं, वहां संबंधित अधिकारी उनकी स्थिति की समीक्षा करें और आवश्यक कार्रवाई पूरी कराते हुए उन्हें प्राथमिकता से आगे बढ़ाएं। राजस्व अभिलेखों का समय से संधारण, उपलब्धता और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई प्रशासनिक कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस दिशा में लापरवाही न बरती जाए।

बैठक में सरफेसी अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत लंबित 27 प्रकरणों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना से संबंधित सात लंबित प्रकरणों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि इन मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए समयसीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और प्रत्येक मामले की प्रगति पर नियमित निगरानी की जाए। इसके अतिरिक्त तहसीलवार घरौनी रिपोर्ट से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि घरौनी से जुड़े मामलों की स्थिति स्पष्ट रखते हुए लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

समीक्षा बैठक में सार्वजनिक सेवायानों से घटित दुर्घटनाओं से संबंधित लंबित मजिस्ट्रियल जांच का विषय भी उठाया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन जांचों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में जांच प्रक्रिया का समय से पूरा होना महत्वपूर्ण है। इसलिए संबंधित अधिकारी आवश्यक अभिलेखों, तथ्यों और औपचारिकताओं को समय से पूरा करते हुए जांच रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने जांच कार्यों की नियमित निगरानी करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

जिलाधिकारी ने चरित्र सत्यापन से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए विशेष रूप से कहा कि इन मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक सप्ताह नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे हैं। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े चरित्र सत्यापन के मामलों को समय से पूरा करना जरूरी है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों की प्रक्रिया प्रभावित न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि चरित्र सत्यापन के सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई तत्काल पूरी की जाए। किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और प्रकरणों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए।

माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में लंबित रिट याचिकाओं और जनहित याचिकाओं (पीआईएल) से संबंधित पत्रावलियों की भी बैठक में समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों में समय से जवाब दाखिल किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालय में समयबद्ध जवाब प्रस्तुत करना प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यक है। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक अभिलेख और तथ्य समय से उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि जवाब दाखिल करने में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायालय से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेते हुए उनकी नियमित समीक्षा करें और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करें।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने सभी राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ करें। उन्होंने कहा कि लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए तथा प्रत्येक मामले की प्रगति पर नजर रखी जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी प्रकरण में अनावश्यक विलंब न हो और संबंधित पक्षों को निर्धारित समय में राहत मिल सके। उन्होंने राजस्व कार्यों में जवाबदेही तय करने, लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर दिया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग के कार्य सीधे तौर पर आमजन की समस्याओं, अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। इसलिए इन मामलों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि समीक्षा बैठक में सामने आए लंबित प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए उनके निस्तारण की प्रभावी कार्ययोजना बनाएं और नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें।

बैठक में अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक संदीप श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, समस्त उपजिलाधिकारी, समस्त तहसीलदार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Share This
अपनी खबर या कोई समस्या इटावा लाइव पर निशुल्क प्रकाशित करने हेतु हमें Whatsapp - 7017070200, Email – etawah.news@gmail.com पर जरुर भेंजें।

Read more

वोट करें

हमारा इटावा

अंग्रेजी शासन में वर्ष 1801 में शामि‍ल कि‍या गया था इटावा

प्रचलि‍त मान्‍यताओं के अनुसार इसी वंश के चन्‍द्रभान ने प्रतापनेर का नगला अर्थात चन्‍दरपुरा बसाया। वि‍क्रम सि‍हं ने  वि‍क्रमपुर बसाया। उन्‍ाके पुत्र प्रतापसि‍हं  ने...

शिक्षाविद

कैलाश चंद्र यादव: नव युग के शिक्षा क्रांतिकारी का प्रेरणादायक सफ़र

कैलाश चंद्र यादव एक प्रख्यात शिक्षाविद् हैं जो पानकुंवर इंटरनेशनल स्कूल, मानिकपुर मोड, ग्वालियर बाईपास, इटावा और पानकुंवर इंटरनेशनल स्कूल, सराय दयानत के प्रबंधक...

राजनीतिज्ञ

संघ के संस्कारों के साथ 55 वर्षों से राष्ट्रभक्ति की अखंड ज्योति थामें डॉ० रमाकान्त शर्मा

डॉ० रमाकान्त शर्मा का जन्म 17 नवम्बर 1957 को में हुआ। उनका बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता, जहाँ सादगी, संस्कार और परिश्रम का संगम...

प्रशासनिक अधिकारी

प्रमुख संस्थान

इटावा में 100 वर्षों से मिठास और विश्वास की पहचान : श्री बल्देव प्रसाद सुरेश यादव मिष्ठान भण्डार

इटावा की पहचान सिर्फ उसकी ऐतिहासिक धरोहरों या जनप्रतिनिधियों से नहीं, बल्कि उसकी मिठास से भी है, और इस मिठास का सबसे प्रामाणिक नाम...

चिकित्सक

डॉ. डी. के. दुबे : एक प्रख्यात हड्डी रोग विशेषज्ञ

जनपद इटावा सहित आस-पास के जिलों में हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. डी. के. दुबे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है,...

चर्चित व्यक्तिव

इटावा के ‘फैब फोर’: आकर्षक व्यक्तित्व और बेमिसाल प्रशासन का परफेक्ट कॉम्बो

इटावा में इन दिनों चार प्रमुख अधिकारियों की चर्चा जोरों पर है। जिलाधिकारी अवनीश राय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी...

पत्रकार

इटावा में उत्कृष्ट लेखनी के लिए जाने जाते हैं पत्रकार तनुज श्रीवास्तव

उत्कृष्ट लेखनी के चलते पत्रकारिता के क्षेत्र में सरल स्वभाव की पहचान रखने वाले तनुज श्रीवास्तव कस्बा भरथना के मुहल्ला बृजराज नगर के मूल...

टॉप आर्टिकल्स

मुलायम सिंह यादव : इटावा का वो बेटा, जिसने बदल दी देश की सियासत

कभी-कभी इतिहास बड़े शहरों के महलों में नहीं, बल्कि गांव की कच्ची पगडंडियों और खेतों की मिट्टी में जन्म लेता है। 22 नवंबर 1939...

व्यवसायी

सर्वेश यादव : एक समर्पित समाजसेवी और सुरक्षा एजेंसी के प्रबंधक

सर्वेश यादव, जनपद इटावा ही नहीं पूरे प्रदेश की सबसे भरोसेमंद सिक्योरिटी एजेंसी "एस.के. ग्रुप ऑफ सिक्योरिटी सर्विस" के प्रबंधक हैं। वे एक व्यवहार...

समाजसेवी

रूबी शर्मा: इटावा की एक प्रेरणादायक समाजसेवी

रूबी शर्मा, एक समर्पित और प्रेरणादायक समाजसेवी, जनपद इटावा में अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए जानी जाती हैं। वे नेकी मानव सेवा संस्थान की...

पूर्व अधिकारी

अजय कुमार गौतम(IAS), मुख्य विकास अधिकारी, इटावा, कवि हृदय और एक कुशल प्रशासक

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन: अजय कुमार गौतम का जन्म 11 सितंबर 1995 को सिद्धनगर, गंजडुंडवारा, कासगंज, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी शिक्षा बाबा कढ़ेरा सिंह...