सैफई, इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के परिसर स्थित ब्लड बैंक में कथित रक्त दलाली के प्रकरण को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कुलपति के निर्देशानुसार इस प्रकरण में नजदीकी सैफई थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रक्त जैसी जीवनरक्षक सुविधा से जुड़ी किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, अनियमितता या दलाली को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ब्लड बैंक में कथित रक्त दलाली का मामला संस्थान के लिए गंभीर विषय है। रक्त जरूरतमंद मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कई परिस्थितियों में समय पर रक्त उपलब्ध होना मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक होता है। ऐसे में रक्त से संबंधित सेवाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधि सामने आना चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिहाज से चिंताजनक है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि रक्त जैसी जीवनरक्षक सुविधा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की दलाली या अनुचित गतिविधि न केवल चिकित्सा सेवाओं की गरिमा को प्रभावित करती है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों की भावनाओं तथा विश्वास के साथ भी खिलवाड़ करती है। मरीज और उनके परिजन उपचार के दौरान पहले से ही मानसिक तनाव और कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं। ऐसे समय में उन्हें पारदर्शी, सुरक्षित और नैतिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए इस प्रकार के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक है।
यूपीयूएमएस प्रशासन ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस तरह की गतिविधियों के प्रति शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई जाती है। प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद मामले में तथ्यों की जांच और संबंधित जिम्मेदारियों का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा, ताकि नियमानुसार उचित कार्रवाई की जा सके।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, मरीजों के हितों, चिकित्सा सेवाओं की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। ब्लड बैंक जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा इकाई में नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। रक्त की उपलब्धता और उससे संबंधित सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखना मरीजों के विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ चिकित्सा व्यवस्था की नैतिकता के लिए भी जरूरी है।
प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इसके तहत संबंधित गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने, व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि संस्थान में मरीजों को सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय क्षेत्र की महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थाओं में शामिल है, जहां मरीज उपचार और विभिन्न चिकित्सा सुविधाओं के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ब्लड बैंक से संबंधित इस प्रकरण पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई को चिकित्सा सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामले में वास्तविक तथ्यों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोहराया है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी।
