इटावा, 02 मई 2026 — जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में गौशालाओं एवं प्राकृतिक खेती के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद की गौशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जहां भी चारागाह एवं ग्राम समाज की भूमि उपलब्ध है, वहां बड़े पैमाने पर नेपियर घास का उत्पादन किया जाए। उन्होंने बताया कि नेपियर घास अत्यंत पौष्टिक हरा चारा है और इसकी जड़ों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों को इस घास का उत्पादन कर स्थानीय स्तर पर पशुपालकों एवं गौशालाओं को उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया।

उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि नेपियर घास की मांग बढ़ाई जाए और जो जड़ें बाहर से मंगवाई गई हैं, उनका समुचित संरक्षण किया जाए ताकि वे नष्ट न हों। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि अभी से गंभीरता के साथ कार्य किया जाए तो आगामी 3-4 महीनों में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध हो सकेगा। इससे गोवंशों के खेतों में जाने की समस्या कम होगी और किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकेंगी।
बैठक में गौशालाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि गौशालाओं में उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से जैविक कीटनाशक एवं अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए गौशालाओं के केयरटेकर एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रमुख मिशन के रूप में अपनाया गया है और केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन गौशालाओं में इसकी अधिक संभावना है, वहां आवश्यक सिविल कार्य कराकर शीघ्र ही गतिविधियां प्रारंभ की जाएं।
उन्होंने यह भी बताया कि जनपद की चार गौशालाओं में इस योजना की शुरुआत की जाएगी और प्रशासन का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी रमेश चंद्र, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह सहित सभी खंड विकास अधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
