नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने “नीतिगत सुधारों के आलोक में घरेलू कोयला उत्पादन में तेजी लाना” विषय पर आज एक उच्च स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कोयला उत्पादन बढ़ाने, खदानों के तेजी से विकास और उनके प्रभावी संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने रणनीतिक मार्गदर्शन देते हुए चर्चा का नेतृत्व किया। इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों, उद्योग विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
अपने संबोधन में मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल क्रमिक सुधार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक और निरंतर बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने “सुधार, प्रदर्शन, रूपांतरण और सूचना” को मार्गदर्शक मंत्र बताते हुए अन्वेषण, नीलामी, मंजूरी, संचालन और वित्त पोषण सहित पूरी कोयला मूल्य श्रृंखला में सुधारों पर जोर दिया। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से खदानों के बंद करने की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति प्रणाली को अधिक कुशल बनाने और खदान विकास से लेकर बंद होने तक सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करना जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री ने हितधारकों के साथ नियमित संवाद को भी अहम बताते हुए कहा कि यह मंच सुझावों और प्रतिक्रिया को शामिल करने में सहायक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार समावेशी और उत्तरदायी तरीके से सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में भारत के प्रचुर कोयला भंडार का बेहतर उपयोग करते हुए कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में कोयला क्षेत्र में निजी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए समन्वित प्रयासों और निरंतर नीतिगत समर्थन के माध्यम से कोयला उत्पादन में तेजी लाने का आह्वान किया।
