गंगा-जमुनी तहजीब की प्रतीक दरगाह हज़रत अरशद अली उर्फ माशूक अली वाईस ख्वाजगान का तीन दिवसीय सालाना उर्स हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरी अकीदत, शांति एवं भाईचारे के वातावरण में सम्पन्न हुआ। उर्स का आयोजन फतेहपुर सीकरी के सज्जादानशीन हज़रत सूफ़ी कमरूद्दीन लियाकती की सरपरस्ती में किया गया, जिसका समापन हज़रत अरशद अली उर्फ माशूक अली रहमतुल्लाह अलैह की कुल की रस्म अदायगी के साथ हुआ।
इस अवसर पर हज़रत सूफ़ी कमरूद्दीन लियाकती ने अपने संदेश में कहा कि दरगाहों से इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम दिया जाता है। इस्लाम में सबसे पहले इंसानियत, प्रेम, भाईचारा और अच्छे अखलाक की शिक्षा दी गई है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में सभी इंसान बराबर हैं, चाहे वे किसी भी वर्ग या समाज से हों।
उर्स संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार मसूद तैमूरी ने बताया कि उर्स शरीफ के पहले दिन बाद नमाज़ फजिर कुरान ख्वानी के साथ शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात चादरपोशी एवं हल्का-ए-जिक्र किया गया। बाद नमाज़ असर मीलाद शरीफ का आयोजन हुआ, जिसमें मौलानाओं, उलेमाओं एवं हाफिजों की उपस्थिति रही।
उर्स के दूसरे दिन भी बाद नमाज़ फजिर कुरान ख्वानी हुई तथा चादरें और गागरे पेश की गईं। इस अवसर पर जनपद इटावा के अलावा मैनपुरी, औरैया, भिण्ड, मुरैना, जालौन, झांसी, हमीरपुर, उरई, ग्वालियर, श्योपुर सहित विभिन्न जनपदों से आए श्रद्धालुओं ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर शांति, अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। रात्रि में बाद नमाज़ ईशा महफिल-ए-समा का आयोजन हुआ, जिसमें मशहूर कव्वालों ने अपना कलाम पेश किया, जो देर रात तक चला।
उर्स के तीसरे एवं अंतिम दिन बाद नमाज़ फजिर कुरान ख्वानी हुई। इसके पश्चात हज़रत अरशद अली उर्फ माशूक अली वाईस ख्वाजगान का गुस्ल शरीफ अदा किया गया और अंत में कुल शरीफ का आयोजन हुआ। रंग-ए-महफिल के साथ तीन दिवसीय सालाना उर्स का समापन किया गया।
उर्स के दौरान सांसद जितेंद्र दोहरे, श्रीकृष्ण यादव, तस्लीम मंसूरी एडवोकेट, अतुल वी.एन. चतुर्वेदी ने चादरपोशी की। सांसद जितेंद्र दोहरे द्वारा उर्स में जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए गए।
इस अवसर पर सपा जिलाध्यक्ष बब्लू शाक्य, महामंत्री बीरू भदौरिया, पूर्व प्रत्याशी सर्वेश शाक्य, प्रवक्ता विक्की गुप्ता, डीबीए अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी, महामंत्री नितिन तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता ज़ुबैर तैमूरी, हाजी गुड्डू मंसूरी, फ़ज़ल यूसुफ खान, व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित, मो. आमीन, सूफी रईस अहमद, सूफी कमर, सूफी अब्दुल सत्तार, सूफी उमर, सूफी फारूख, खादिम अब्बास, मुन्ना खालिद, कांग्रेस नेता कोमल सिंह कुशवाहा, मो. राशिद खान, मेंहदी हसन अंसारी, शावेज़ नक़वी, इरशाद खान, दिलशाद कादरी, राजू मसूरी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

