कांग्रेस जिला कार्यालय पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। जिला अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित ने कहा कि विगत आठ सालों में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं और दलितों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध यूपी में दर्ज हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में महिलाओं पर होने वाले अपराधों में से 15 प्रतिशत अपराध अकेले उत्तर प्रदेश में होते हैं।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद राशिद ने भाजपा शासनकाल में सामाजिक अपराधों की पुनरावृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दलितों की बारातों पर हमले, घोड़ी चढ़ने से रोकना और दबंगों द्वारा उन्हें अपने क्षेत्रों से खदेड़ना जैसी घटनाएं फिर से बढ़ने लगी हैं। उन्होंने इसे प्रदेश में अराजकता का माहौल करार दिया।
पूर्व शहर अध्यक्ष पल्लव दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज हिंदू समाज और विशेषकर दलित महिलाएं व बच्चियां सबसे अधिक प्रताड़ित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का डर समाप्त हो गया है और मुख्यमंत्री अपराधियों की पहचान भी जाति और धर्म देखकर करते हैं। वहीं, जिला प्रवक्ता प्रेरणा जुबैरी ने बताया कि पिछले एक महीने में जिले में सैकड़ों आपराधिक घटनाएं घटीं, लेकिन पुलिस कार्रवाई या तो नहीं हुई या फिर उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
प्रेस वार्ता में नेताओं ने बलराई, बढ़पुरा, चकरनगर और भरथना जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार आपराधिक घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने हाल ही में ड्रोन के जरिए हो रही चोरी और हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोग रातभर जागने को मजबूर हैं, जबकि पुलिस इन्हें अफवाह बताकर पल्ला झाड़ रही है। अंत में कांग्रेस जिला अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित ने कहा कि यदि योगी सरकार से प्रदेश संभल नहीं रहा तो मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्रेस वार्ता में पीसीसी सदस्य कोमल सिंह कुशवाहा, प्रवक्ता वाचस्पति द्विवेदी, प्रदीप द्विवेदी और अनुराग कर्ण सहित कई कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
