दिल्ली पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने मदन लाल आर्य की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी विरासत हमें निरंतर प्रेरित और मार्गदर्शित करती है। हम उनके निःस्वार्थ योगदान, अटूट समर्पण और अग्रणी सोच को कृतज्ञता के साथ स्मरण करते हैं, जिन्होंने इटावा में सार्वजनिक विद्यालय शिक्षा की आधारशिला रखी।उनका दृष्टिकोण और मूल्य हमारी राह को आलोकित करते रहें और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहें।

मदन लाल आर्य के जीवन में बहुत संघर्ष देखा गया। वर्ष 1979 में उन्होंने सरस्वती ज्ञान मंदिर योजना की नींव रखी। वे सरस्वती ज्ञान मंदिर के संस्थापक थे और उत्तर भारत में 13,500 से अधिक स्कूलों का विस्तार करके लाखों बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रदान की।

उनके समय में देश में आधुनिक प्राथमिक स्कूलों की कमी थी, इसलिए मदन लाल जी आर्य ने कम फीस में बच्चों की पढ़ाई के लिए व्यवस्था की। उनकी पत्नी, स्वर्गीय राम बेटी, ने उनके साथ शिक्षण कार्य शुरू किया और बाद में सरकारी शिक्षक के रूप में कार्य किया।

मदन लाल आर्य 22 फरवरी 2006 को लगभग 58 वर्ष की कम उम्र में ब्रह्मलीन हो गए। उनकी मृत्यु पर इटावा ही नहीं पूरे उत्तर भारत में शोक का सागर छाया रहा। मदन लाल जी आर्य हमेशा लोगों के हृदय में बसते रहेंगे। उन्होंने लोगों के जीवन में गहरी छाप छोड़ी है।

मदन लाल आर्य के जाने से एक महान आदर्श, एक समाजसेवी, एक उदाहरणीय गुरु और एक अद्भुत मानव हमें छोड़ गए। उनके जीवन के कार्यों और उपलब्धियों के आधार पर हमें सामाजिक न्याय, शिक्षा के महत्व, सेवा की भावना और समर्पण की महत्ता को समझने का अवसर मिलता है।
मदन लाल आर्य, बेहद उदार ह्रदय के स्वामी थे जिन्होंने अपने जीवन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सक्रिय सदस्य के रूप में गर्व से सेवा की। उनकी प्रवृत्ति, नैतिकता और सामर्थ्य में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मूल्यों और सिद्धांतों की झलक देखी जा सकती थी।
