इन दिनों जिले में गेहूं की फसल में सिंचाई की आवश्यकता बढ़ गई है, लेकिन नहरों में पानी की कमी से किसान परेशान हो गए हैं। किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि समय भी अधिक लग रहा है।
सिंचाई विभाग के अधिकारी इस समस्या पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए केवल पानी की डिमांड भेजने की बात कह रहे हैं। जिले में 94 हजार हेक्टेयर से अधिक गेहूं की फसल है, और इस फसल की सिंचाई के लिए मुख्यतः भोगनीपुर निचली गंगा नहर, रजबहा और माइनरों का पानी उपयोग किया जाता है।

दुर्भाग्यवश, भोगनीपुर निचली गंगा नहर में बीते 10 दिनों से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है, जबकि इटावा प्रखंड में पानी की आपूर्ति चल रही है। इस नहर से न केवल इटावा, बल्कि औरैया और कानपुर देहात के एक लाख से अधिक किसानों की फसल की सिंचाई होती है।
इस समय गेहूं की फसल में दाना निकलने का समय है और अगेती फसल में दाना भी निकल आया है। ऐसे में इन फसलों को सिंचाई की बेहद आवश्यकता है। जहां एक ओर नहर और रजवाहा सूखे पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर फरवरी माह की शुरुआत से ही तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो अब लगातार जारी है। इस कारण किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए और अधिक मेहनत करनी पड़ रही है।
