स्वास्थ्य विभाग हर साल बेसिक स्कूलों में फर्स्ट एड बॉक्स भेजता है, ताकि बच्चों को चोट लगने पर तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सके। हालांकि, विभाग के कागजों में सब कुछ सही दिख रहा है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने 1595 स्कूलों में फर्स्ट एड बॉक्स भेजने की रिपोर्ट दी है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इन बॉक्सों को स्कूलों तक नहीं भेजा गया है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण कंपोजिट विद्यालय नौरंगाबाद है, जहां कक्षा एक से आठ तक के 115 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस स्कूल में एक साल पहले प्रधानाचार्य फरजाना रिजवनी का स्थानांतरण हो गया था और अब शिक्षामित्र राधा अवस्थी बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस साल बच्चों को दी जाने वाली फर्स्ट एड किट अभी तक नहीं आई है।
शिक्षामित्र राधा अवस्थी ने कहा कि बच्चों के लिए फर्स्ट एड बॉक्स का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई किट स्कूल में नहीं पहुंची है। इस स्थिति में सवाल उठता है कि ये फर्स्ट एड बॉक्स भेजे तो गए कहां? स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बीच इस मुद्दे पर आपसी तालमेल की कमी साफ तौर पर नजर आ रही है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
