इटावा। अमृत भारत योजना के तहत इटावा जंक्शन पर 33 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे स्टेशन का पुनरोद्धार कार्य तेजी से चल रहा है। इन दिनों जंक्शन के लाइनपार क्षेत्र में द्वितीय प्रवेश द्वार के साथ 12 मीटर के नए एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग 60 कर्मचारी और दो इंजीनियर कार्यरत हैं, जिन्हें सुरक्षा के उचित उपकरण जैसे हेलमेट, जैकेट इत्यादि नहीं दिए गए हैं। ऐसे में कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के ही काम कर रहे हैं, जो कि उनकी सुरक्षा के लिए खतरे की बात है।
अमृत भारत योजना के तहत इटावा रेलवे जंक्शन के पुनरोद्धार कार्य की देखरेख रेलवे की गति शक्ति यूनिट द्वारा की जा रही है। इस कार्य में जंक्शन की पुरानी बिल्डिंग की रंगाई-पुताई, मरम्मत, और जीआरपी थाने के बगल में वाहन स्टैंड के निर्माण के अलावा लाइनपार इलाके में द्वितीय प्रवेश द्वार की नई बिल्डिंग बनानी है। यह कार्य किदवई नगर कानपुर की विकल्प कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका मिला है, और वर्तमान में द्वितीय प्रवेश द्वार की बिल्डिंग पर कार्य चल रहा है।

हालांकि, जहां एक ओर परियोजना का कार्य तेजी से चल रहा है, वहीं इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण न दिए जाने से उनके लिए खतरे का कारण बन सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि जब काम की परिस्थितियां कठिन और जोखिमपूर्ण होती हैं, तो उन्हें सुरक्षा उपकरणों की सख्त जरूरत है, ताकि कोई दुर्घटना न हो।
रेलवे प्रशासन और ठेकेदार को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
