कड़ाके की ठंड का फायदा उठाकर तस्करों ने कछुओं की तस्करी का प्रयास किया, लेकिन वन विभाग और अन्य एजेंसियों की सतर्कता के चलते यह योजना नाकाम हो गई। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (बॉर्डर यूनिट गोरखपुर), वन विभाग इटावा, और एसटीएफ कानपुर की संयुक्त टीम ने इटावा में एक ट्रक से 528 कछुओं को बरामद किया। मुखबिर की सूचना पर मैनपुरी की ओर से आ रहे ट्रक को रोका गया, जिसमें 16 बोरों में सुंदरी प्रजाति के कछुए भरे हुए थे।

वन विभाग के डीएफओ अतुल कांत शुक्ला ने बताया कि तस्करों ने बिजली के सामान की आड़ में कछुओं की तस्करी की योजना बनाई थी। ट्रक में दिल्ली से बिजली का सामान लदा हुआ था, जिसे ढाका ले जाया जाना था। तस्कर इस सामान के बीच कछुओं को छिपाकर कोलकाता पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों ने इसे वन्यजीव संरक्षण के खिलाफ गंभीर अपराध बताया है।
बरामद कछुओं का उपयोग शक्ति वर्धक दवाइयों और सूप बनाने के लिए किया जाता है। डीएफओ अतुल कांत शुक्ला ने बताया कि इन कछुओं की बाजारू कीमत ज्यादा नहीं है, लेकिन तस्करी के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि कछुओं की तस्करी को रोकने के लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है और तस्करों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई को लेकर डीएफओ ने अपराधियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में अपराधी यह न सोचें कि पुलिस या वन विभाग निष्क्रिय है। विभाग की टीम हर समय सतर्क है और ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि बरामद कछुओं को सुरक्षित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वन विभाग ने तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस तस्करी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। डीएफओ ने कहा कि जांच के आधार पर जल्द ही अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह सफलता वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और वन विभाग की सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
