इटावा। प्रदेशभर में व्यापारियों को नगरपालिका, नगर निगम, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद की ओर से जारी किए जा रहे सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण के नोटिसों के विरोध में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने आवाज उठाई है। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर बुधवार, 21 अक्टूबर को इटावा में बड़ी संख्या में व्यापारियों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर व्यापारियों की समस्याओं के समाधान और प्रभावित दुकानदारों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में व्यापारियों को दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में सीलिंग तथा ध्वस्तीकरण के नोटिस दिए जा रहे हैं। इससे लंबे समय से कारोबार कर रहे व्यापारियों के सामने दुकान बंद होने और आजीविका प्रभावित होने की चिंता खड़ी हो गई है। व्यापार मंडल ने मांग की कि वर्षों से विकसित बाजारों और आवासीय कॉलोनियों में संचालित दुकानों के मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाए।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन में कहा कि विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद की ओर से विकसित की गई कई कॉलोनियों में पर्याप्त बाजारों की व्यवस्था नहीं की गई थी। ऐसे में स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापारियों ने अपने स्तर पर दुकानों और बाजारों का विकास किया। इन बाजारों के माध्यम से लोगों को दैनिक उपयोग की वस्तुएं और विभिन्न सेवाएं अपने आसपास उपलब्ध होती हैं। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपने कारोबार के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ करों का भुगतान कर अर्थव्यवस्था में भी योगदान दिया है।
व्यापार मंडल के अनुसार, व्यापारी कमर्शियल बिजली बिल, कमर्शियल हाउस टैक्स, जीएसटी, आयकर और अन्य करों के माध्यम से सरकार को राजस्व देते हैं। इसके बावजूद पुराने शहरों के विकसित क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों और नई विकसित कॉलोनियों में आवासीय परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को अवैध निर्माण या नियमों के उल्लंघन से जोड़ते हुए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। व्यापार मंडल ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों का समाधान व्यापारियों को विश्वास में लेकर और स्पष्ट नियम बनाकर किया जाना चाहिए, ताकि कारोबार और लोगों की आजीविका पर अनावश्यक संकट न आए।
ज्ञापन में व्यापार मंडल ने उच्चतम न्यायालय से संबंधित आदेशों के संदर्भ में भी अपनी आपत्तियां रखीं। पदाधिकारियों का आरोप है कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने न्यायालय के समक्ष तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया और अब न्यायालय के आदेशों की आड़ में व्यापारियों को सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण के नोटिस दिए जा रहे हैं। व्यापार मंडल ने इस संबंध में निष्पक्ष समीक्षा किए जाने तथा संबंधित मामलों में तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। ये आरोप व्यापार मंडल की ओर से ज्ञापन में उठाए गए हैं।
व्यापारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।
पहली मांग: व्यापारियों को अपने आवासीय भवन में दुकान खोलकर कारोबार करने की अनुमति देने के लिए कानून बनाया जाए, जिससे छोटे व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर व्यवसाय संचालित करने का अवसर मिल सके और उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।
दूसरी मांग: पहले से विकसित हो चुके बाजारों और कॉलोनियों को नियमित करने के लिए स्पष्ट कानून बनाया जाए। व्यापार मंडल का कहना है कि लंबे समय से संचालित बाजारों और दुकानों के मामलों का समाधान व्यवस्थित नीति के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि व्यापारियों को बार-बार नोटिस और कार्रवाई की आशंका का सामना न करना पड़े।
तीसरी मांग: जिन बाजारों और दुकानों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, उनसे प्रभावित सभी पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास की व्यवस्था के लिए कानून बनाया जाए। व्यापार मंडल ने कहा कि दुकानें टूटने से प्रभावित व्यापारियों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे लोगों के पुनर्वास के लिए ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए।
चौथी मांग: अवैध निर्माण के मामलों में भवन स्वामी के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। व्यापार मंडल का तर्क है कि निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन में यदि अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत अथवा लापरवाही सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई कि ऐसे मामलों में केवल भवन स्वामी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रस्तुत मांगपत्र पर शीघ्र और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कानून के दायरे में रहते हुए किया जाना चाहिए। साथ ही, पुराने और विकसित बाजारों की स्थिति को ध्यान में रखकर ऐसी नीति तैयार की जाए, जिससे नियमों का पालन भी हो और व्यापारियों की आजीविका भी प्रभावित न हो।
ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्वेश सिंह चौहान, जिला अध्यक्ष आलोक दीक्षित, जिला उपाध्यक्ष अशोक जाटव, हाजी हन्नान मंसूरी, लाइन पार शहर अध्यक्ष सुनील कुमार कुशवाहा, युवा जिलाध्यक्ष रियाज अहमद, युवा शहर अध्यक्ष रहमान, उद्योग मंच के जिला अध्यक्ष राहुल दीक्षित, जिला सचिव आफताब खान, युवा जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव और शहर उपाध्यक्ष हफीज खान सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान व्यापारियों ने अपनी समस्याओं को संगठित तरीके से प्रशासन के सामने रखा और मांग की कि सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से संबंधित मामलों में व्यापारियों के हितों, लागू नियमों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाए। व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया कि वह व्यापारियों की समस्याओं को लेकर प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर अपनी आवाज उठा रहा है और सरकार से इस विषय में प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा करता है।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश की ओर से सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य प्रदेशभर में व्यापारियों को जारी किए जा रहे सीलिंग और ध्वस्तीकरण के नोटिसों से जुड़ी समस्याओं को सरकार के सामने रखना रहा। व्यापार मंडल ने पुराने बाजारों को नियमित करने, आवासीय भवनों में दुकान चलाने के लिए कानूनी व्यवस्था बनाने, ध्वस्तीकरण से प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। अब व्यापारियों की निगाहें सरकार की ओर से इन मांगों पर की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
