महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के उद्देश्य से संचालित मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत इटावा में बालिकाओं को प्रशासनिक नेतृत्व का अनुभव प्रदान करने के लिए एक विशेष पहल की गई। इसके तहत कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, नगर क्षेत्र, इटावा की तीन छात्राओं को एक दिन के लिए जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों का दायित्व सौंपा गया। कक्षा सात की छात्रा वर्तिका सिंह को एक दिन का जिलाधिकारी, कक्षा सात की छात्रा खुशी को एक दिन का मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) तथा कक्षा आठ की छात्रा काजल को एक दिन का जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) बनाया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और भविष्य में जिम्मेदार पदों पर पहुंचने की आकांक्षा विकसित करना रहा।

मिशन शक्ति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि शिक्षा और परिश्रम के बल पर बालिकाएं भी प्रशासनिक सेवाओं सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों तक पहुंच सकती हैं। आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारियों को सरकारी योजनाओं के संचालन, विकास कार्यों की निगरानी, जनसमस्याओं के समाधान और विभागीय जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़े कार्य करने होते हैं। ऐसे में छात्राओं को इन पदों से जोड़ने की पहल उन्हें प्रशासन की भूमिका समझने और भविष्य में अपने करियर के संबंध में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करने वाली रही।
इस अवसर पर जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने कहा कि बालिकाओं में प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की है। उन्होंने कहा कि यदि बालिकाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और उन्हें आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। समाज में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास विकसित करना भी आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने कहा कि मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। बालिकाओं को उनकी क्षमता और संभावनाओं से परिचित कराना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब छात्राओं को जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है, तो वे अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने के साथ यह समझ पाती हैं कि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए किस प्रकार की तैयारी, मेहनत और अनुशासन की आवश्यकता होती है। ऐसे कार्यक्रम उनके मन में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का विश्वास मजबूत करते हैं।
उन्होंने छात्राओं को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। जिलाधिकारी ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित अध्ययन, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्राओं को अपने भविष्य के प्रति गंभीर रहते हुए शिक्षा के प्रत्येक अवसर का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने उन्हें भविष्य में जिम्मेदार पदों पर पहुंचकर समाज और देश की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उनका संदेश रहा कि बालिकाएं अपनी योग्यता और परिश्रम के बल पर आगे बढ़ें तथा समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
एक दिन के लिए प्रशासनिक पदों का दायित्व मिलने पर छात्राओं के चेहरे पर उत्साह, खुशी और आत्मविश्वास दिखाई दिया। कक्षा सात की छात्रा वर्तिका सिंह को जिलाधिकारी की भूमिका निभाने का अवसर मिला, जबकि इसी कक्षा की छात्रा खुशी को मुख्य विकास अधिकारी और कक्षा आठ की छात्रा काजल को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का दायित्व सौंपा गया। तीनों छात्राओं के लिए यह अनुभव सामान्य शैक्षिक गतिविधियों से अलग रहा, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें जिले की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के बारे में जानने और उनकी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
छात्राओं ने इस अवसर को अपने लिए गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों से जुड़ना उनके लिए नया अनुभव है। इस पहल से उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने, जिम्मेदारियों का एहसास करने और भविष्य में अपने लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा मिली है। छात्राओं ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हुए मेहनत और लगन से अपने सपनों को साकार करने की इच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि छात्राओं को केवल पदों के नाम से परिचित कराने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें नेतृत्व और जिम्मेदारी के महत्व का एहसास कराने का प्रयास किया गया। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जैसे पदों पर कार्य करने वाले अधिकारियों की भूमिका जिले के प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण होती है। इन पदों के माध्यम से छात्राओं को यह समझने की प्रेरणा मिली कि प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के लिए अध्ययन, निर्णय क्षमता, अनुशासन और जनहित के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक होती है।
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत यह पहल बालिकाओं के सशक्तीकरण को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ-साथ उन्हें नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराना भी सशक्तीकरण का अहम हिस्सा है। जब छात्राओं को प्रशासनिक भूमिकाओं से परिचित कराया जाता है, तो उनके मन में सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को लेकर जागरूकता बढ़ती है। साथ ही, वे अपने भविष्य के विकल्पों के बारे में अधिक व्यापक दृष्टिकोण विकसित कर सकती हैं।
इस प्रकार के कार्यक्रम बालिकाओं को यह विश्वास दिलाने में मदद करते हैं कि उनकी क्षमताएं किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार बन सकती हैं। जरूरत है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। छात्राओं को प्रशासनिक पदों का प्रतीकात्मक दायित्व सौंपने के पीछे भी यही भावना रही कि वे स्वयं को सक्षम समझें और भविष्य में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित हों।
इटावा में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत आयोजित इस पहल ने बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और महत्वाकांक्षाओं को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। वर्तिका सिंह, खुशी और काजल को मिले इस अवसर ने यह रेखांकित किया कि बालिकाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपनी क्षमता पहचानने का अवसर देना जरूरी है। शिक्षा, परिश्रम और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से बालिकाएं भविष्य में उच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
